डॉक्टरों की गैरहाजिरी से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, पांच चिकित्सकों को नोटिस

एटा। जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही है, लेकिन अब चिकित्सकों की लगातार गैरहाजिरी ने हालात और भी गंभीर बना दिए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के अधीन तैनात पांच डॉक्टर लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए हैं। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ कार्यालय ने सभी चिकित्सकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
नोटिस प्राप्त करने वाले चिकित्सकों में डॉ. नेहा चौधरी (पीएचसी सरौंठ), डॉ. अंकित मित्तल (पीएचसी खड़ौआ), डॉ. अजेंद्र सिंह और डॉ. आकांक्षा सिंह (सीएचसी बागवाला) तथा डॉ. लवेश कुमार (सीएचसी सकीट) शामिल हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर पहले से ही डॉक्टरों के पद खाली हैं, ऐसे में चिकित्सकों का अनुपस्थित रहना ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। मरीजों को मामूली बीमारी के इलाज के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब जिले के आठ विशेषज्ञ चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेज के अधीन कर दिया गया। इसके चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं। गंभीर रोगों के मरीजों को मजबूरी में जिला अस्पताल या बाहर के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जिससे उन्हें समय और धन दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 8 सीएचसी और 29 पीएचसी हैं, जहां कुल 156 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 82 नियमित और 26 संविदा डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 48 पद खाली हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य सेवाएं लगातार चरमरा रही हैं।
सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अनुपस्थित चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी समस्या है और इसे दूर करने के लिए विभाग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन की सख्ती के बाद ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।





