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आई कॉन्टैक्ट से झिझक दूर करने के आसान तरीके, बातचीत में बढ़ेगा आत्मविश्वास

नई दिल्ली। बातचीत के दौरान सामने वाले की आंखों में आंखें डालकर बात करना कई लोगों के लिए चुनौती बन जाता है। अहम मीटिंग हो या किसी खास व्यक्ति से मुलाकात, नजर मिलते ही आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता है और बात अधूरी रह जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आई कॉन्टैक्ट केवल बॉडी लैंग्वेज नहीं बल्कि बिना शब्दों के अपनी बात रखने का प्रभावी माध्यम है, जिसे अभ्यास से बेहतर किया जा सकता है।

अगर सीधे आंखों में देखना असहज करता है तो ‘ट्रायंगल’ तकनीक अपनाई जा सकती है। इसके तहत सामने वाले के चेहरे पर एक काल्पनिक त्रिकोण बनाकर कभी एक आंख, कभी दूसरी आंख और फिर नाक या होंठों की ओर नजर ले जानी चाहिए। इससे सामने वाले को ध्यान दिए जाने का एहसास होता है और दबाव भी कम महसूस होता है।

विशेषज्ञ बातचीत के दौरान 50/70 के फॉर्मूले की सलाह देते हैं। बोलते समय लगभग 50 प्रतिशत और सुनते समय करीब 70 प्रतिशत आई कॉन्टैक्ट बनाए रखना संवाद को सहज और प्रभावी बनाता है। इससे आत्मविश्वास भी स्वाभाविक रूप से झलकता है।

पहली मुलाकात में सामने वाले की आंखों के रंग पर ध्यान देने की कोशिश भी उपयोगी मानी जाती है। इसके लिए कुछ सेकंड तक नजर मिलानी पड़ती है, जिससे धीरे-धीरे आई कॉन्टैक्ट बनाने की आदत विकसित होती है।

सीधे अजनबियों के सामने खुद को परखने के बजाय पहले परिवार, दोस्तों या करीबी लोगों के साथ अभ्यास करना बेहतर होता है। परिचित माहौल में सहजता आने के बाद बाहरी दुनिया में भी आत्मविश्वास अपने आप दिखने लगता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि आई कॉन्टैक्ट का मतलब घूरना नहीं है। अगर असहजता महसूस हो तो कुछ सेकंड के लिए नजरें हटाकर दोबारा सामने देखना स्वाभाविक बातचीत का हिस्सा है। नियमित अभ्यास से यह आदत मजबूत होती है और कई बार आंखें शब्दों से ज्यादा प्रभावशाली साबित होती हैं।

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