मिशन अमृत की रफ्तार धीमी, 1795 करोड़ मंजूर लेकिन अब तक सिर्फ 477 करोड़ खर्च

छत्तीसगढ़ में नगरीय विकास से जुड़ी केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मिशन अमृत 2.0 के क्रियान्वयन की गति बेहद धीमी नजर आ रही है। योजना के तहत राज्य के लिए 1795 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है, लेकिन अब तक केवल 477 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जल आपूर्ति और सीवरेज से जुड़ी कई परियोजनाओं के लिए कार्यादेश जारी किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका है। पिछले दो वर्षों में राज्य के 24 नगरीय निकायों में जल आपूर्ति योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर मंजूरी दी गई, वहीं प्रमुख शहरों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण की योजना भी शामिल है।
मिशन अमृत 2.0 के तहत राज्य में लाखों नल कनेक्शन, सीवरेज नेटवर्क विस्तार, जलाशयों के पुनर्जीवन और हरित क्षेत्रों के विकास का लक्ष्य रखा गया है। इन सभी परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खर्च की रफ्तार में तेजी नहीं लाई गई, तो तय समय में लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इससे शहरी क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। योजना की धीमी प्रगति को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।





