नियद नेल्ला नार योजना से बस्तर में विकास की नई रोशनी, 397 गांव पहुंचे मुख्यधारा में

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही ‘नियद नेल्ला नार’ योजना बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में ऐतिहासिक बदलाव ला रही है। गोंडी और हलबी भाषा में इसका मतलब है ‘आपका अच्छा गांव’, और योजना का मुख्य उद्देश्य है – सुदूर गांवों को सुरक्षा, विकास और भरोसेमंद शासन के साथ जोड़ना।
पहले जहां सरकारी सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल था, वहीं अब 69 फॉरवर्ड कैंपों से जुड़े 397 गांवों तक सरकार की सीधी पहुंच हो गई है। इस मॉडल के तहत पांच किलोमीटर के दायरे से शुरू हुई सरकारी सेवाएं अब 10 किलोमीटर तक विस्तार कर चुकी हैं।
सेवाएं अब गांव की चौखट पर
इस योजना के तहत लोग अब अस्पताल, स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन, आधार कार्ड, पेंशन, आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान कार्ड, रोजगार और किसान सहायता जैसी सुविधाएं वहीं गांव में ही पा रहे हैं।
पहले जिन सेवाओं के लिए दिनों की पैदल यात्रा करनी पड़ती थी, अब वही सुविधाएं कैंप और मोबाइल टीमों के जरिए घर के पास उपलब्ध हो रही हैं।
डिजिटल क्रांति – पहली बार गांवों में नेटवर्क
इस अभियान का सबसे बड़ा असर संचार पर दिखाई देता है। योजना के तहत 700 से ज्यादा मोबाइल टावर लगाए गए हैं, जिनमें 4G टावर भी शामिल हैं।
कुंडापल्ली, अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में आज़ादी के बाद पहली बार मोबाइल नेटवर्क पहुंचा। अब ग्रामीणों के लिए बैंकिंग, ऑनलाइन पढ़ाई और टेलीमेडिसिन संभव हो सका है।
सड़क, बिजली और बाजारों में सुधार
- कई गांवों को पहली बार घर-घर बिजली मिली।
- दूरस्थ अबूझमाड़ में बस सेवाएं शुरू हुईं।
- बारहमासी सड़कें और पुल बनने से आवाजाही आसान हुई।
- जहां हाट-बाजार बंद थे, वहां फिर से व्यापार शुरू हुआ।
इस बदले माहौल में युवाओं को रोजगार और नए अवसर मिलने लगे हैं।
नक्सल प्रभाव कमजोर, लोगों में भरोसा मजबूत
पहले जहां सरकारी कदम रखना मुश्किल था, वहां अब लोग स्वयं आगे बढ़कर सरकारी योजनाओं से जुड़ रहे हैं।
योजना की शुरुआत से अब तक 599 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और कई क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियाँ कम हुई हैं। यह साबित करता है कि विकास और संवाद से शांति का रास्ता खुलता है।
गांवों में बदलाव के उदाहरण
- कलेपाल: सड़क और बिजली से बाजार दोबारा जीवित
- कोलेंग: आंगनबाड़ी और मूलभूत सुविधाओं की शुरुआत
- पूवर्ती: वर्षों बाद राशन दुकान, मोबाइल नेटवर्क, DTH
- हुंगी (तर्रेम): पहला प्रधानमंत्री आवास, ग्रामीणों में नई उम्मीद
इन गांवों में बदलाव यह दिखाते हैं कि योजना सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखा रही है।
‘नियद नेल्ला नार’ योजना ने साबित किया है कि संवेदनशील प्रशासन, सुरक्षा और विकास एक साथ मिलकर सबसे कठिन क्षेत्रों में भी बदलाव ला सकते हैं।
397 गांवों को मुख्यधारा से जोड़कर यह मॉडल भारत में ग्रामीण प्रशासन के सबसे सफल और मानव-केंद्रित उदाहरणों में से एक बन रहा है।





