भूपेश बघेल का पलटवार: “गार्डन के नाम पर गरीबों को उजाड़ना अन्याय”, लिंगियाडीह धरने में दिया समर्थन

बिलासपुर। लिंगियाडीह में गरीब परिवार अपने घर बचाने के लिए लगातार 37 दिनों से धरने पर बैठे हैं। इसी बीच बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल धरना स्थल पहुंचे और लोगों को अपना समर्थन देते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गार्डन और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के नाम पर गरीबों के घर तोड़ना अमानवीय है और इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बघेल ने धरनास्थल पर मौजूद लोगों से कहा कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं बल्कि परिवार, भविष्य और जीवन के अस्तित्व की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरी कर पाई-पाई जोड़कर बनाए गए घरों को पहले सड़क चौड़ीकरण और अब गार्डन के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि जिन लोगों से 10 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से पैसे लिए गए, उन्हें उसी जगह पट्टा मिलना चाहिए, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लिंगियाडीह के लोग महीनों से डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं। महिलाओं की नींद, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों का सुकून सब कुछ दांव पर लग गया है। उन्होंने सरकार पर हिंसक घटनाओं में बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों को हिरासत में लेना गलत है। तमनार की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिना स्थानीय लोगों को न्याय दिए, बाहर से मजदूर लाना स्थानीय युवाओं के हक से खिलवाड़ है।

बघेल ने साफ चेतावनी दी कि गरीबों के घर गिराने और बस्ती को उजाड़ने की किसी भी कार्रवाई का कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा, “गार्डन गरीबों के आंसुओं पर नहीं बन सकता।”

अब सवाल यह है कि क्या सरकार धरना दे रहे परिवारों की मांग सुनेगी या फिर विवाद और गहरा होगा नजरें प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं।

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