बिलासपुर में फैक्ट्री अग्निकांड: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, क्रांति सेना ने सौंपा ज्ञापन

बिलासपुर। मित्तल फर्नीचर फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि कई मजदूरों की जान खतरे में पड़ गई। घटना के बाद प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी मंगलवार को कलेक्टर से मिले और इस मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि फैक्ट्री के अंदर करीब 30 हजार लीटर ज्वलनशील तारपीन तेल रखा गया था, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं थी। न खिड़कियां, न आपातकालीन द्वार, न फायर सेफ्टी सिस्टम—ऐसे में आग लगते ही मजदूर अंदर फंस गए और अफरा-तफरी मच गई।

प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि फैक्ट्री में औद्योगिक सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा था। इससे पूरे जिले में चल रहे उद्योगों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।

संगठन ने मृतक मजदूर के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को नौकरी देने, और फैक्ट्री प्रबंधन पर FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही जिले की सभी फैक्ट्रियों में अनिवार्य फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और बिना सुरक्षा मानकों वाली इकाइयों को बंद करने की मांग भी उठाई गई है।

अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।

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