धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के ‘खुजली’ बयान पर पत्रकार जगत में उबाल, बिलासपुर से उठा विरोध का स्वर

बिलासपुर। कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा पत्रकारों को लेकर दिए गए बयान ने प्रदेश ही नहीं, देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। पत्रकारों के लिए ‘खुजली’ शब्द के इस्तेमाल पर पत्रकार समाज ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। इस बयान को पत्रकारिता की गरिमा और सम्मान पर सीधा हमला बताया जा रहा है। शास्त्री इस समय भिलाई के जयंती स्टेडियम में कथा सुना रहे हैं, और वहीं दिया गया बयान लगातार विरोध का कारण बन रहा है।

बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव के दौरान जब ग्रैंड न्यूज़ की टीम ने पत्रकारों से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया ली, तो नाराजगी साफ झलकी। वरिष्ठ पत्रकार मणिशंकर पांडेय ने कहा, “यह अहंकारी भाषा है। पत्रकारों को ‘खुजली’ कहना अपमानजनक है। कई लोग खुद प्रचार के लिए पत्रकारों को बुलाते हैं, ऐसे में इस तरह के शब्द पूरे पत्रकार समाज का अपमान हैं।”

वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र पाठक ने कहा कि पत्रकार की कोई जाति–धर्म नहीं होता, वह समाज की आवाज़ होता है। उन्होंने कहा कि मंच से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकती और शब्दों की ताकत को समझना आवश्यक है। पत्रकार जितेंद्र सिंह ठाकुर ने भी कहा कि धार्मिक प्रवचन देना अलग बात है, लेकिन किसी भी समुदाय के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग गलत है। “लोकतंत्र में पत्रकार सवाल पूछता है, यही उसका कर्तव्य है,” उन्होंने कहा।

इस मामले पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अभय नारायण ने टिप्पणी को लोकतंत्र और पत्रकारिता का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने वाली वाणी ही संत की पहचान होती है और शास्त्री को बयान वापस लेकर सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।

पत्रकारों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। वे कहते हैं कि सवाल पूछना कोई ‘खुजली’ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सेहत का पैमाना है और हर जिम्मेदार व्यक्ति को इसे समझना चाहिए।

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