कांगेर घाटी को यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल कराने की प्रक्रिया तेज, फरवरी में होगा फैसला

कांकेर। कांगेर घाटी, छत्तीसगढ़ की रहस्यमयी गुफाओं और जैव-विविधता से भरपूर प्राकृतिक जंगल को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया अब तेज हो गई है।
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के वैज्ञानिक घाटी की विशिष्टताओं पर विस्तृत शोध रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह रिपोर्ट फरवरी में पेरिस स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र भेजी जाएगी।
रिपोर्ट के आधार पर यूनेस्को द्वारा घाटी का गहन अध्ययन और मूल्यांकन किया जाएगा और स्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय लिया जाएगा। हाल ही में बिलासपुर के पास कोपरा गांव का जलाशय राज्य का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है।
वैज्ञानिकों ने कांगेर घाटी का साइट सर्वे पूरा कर लिया है। घाटी में कुटमसर, कैलाश और दंडक जैसी प्रमुख गुफाओं के साथ ग्रीन गुफा और कई छोटी गुफाएं भी मौजूद हैं।
पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ अरुण पांडे के अनुसार, घाटी के बारे में तैयार की गई रिपोर्ट ही यूनेस्को को भेजी जाएगी। विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से कांगेर घाटी का महत्व बढ़ेगा और पर्यटन, खासकर विदेशी पर्यटन, को बढ़ावा मिलेगा।
इस साल खोजी गई ग्रीन गुफा में 26 जनवरी से पर्यटकों की एंट्री की अनुमति होगी। इसके लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। गुफा के भीतर पहुँचने के लिए पाथवे बनाया जा रहा है और रोशनी के लिए सोलर लाइट्स लगाई जा रही हैं। लोगों की सुविधा के लिए कुछ स्थानों पर स्टील की रेलिंग भी लगाई जा रही है।
अभी तक गुफा के भीतर केवल वन विभाग और रिसर्च टीम ही पहुंची है। गुफा के भीतरी हिस्से में कई जगह दीवार और छत वाला हिस्सा हरा (ग्रीन) दिखाई देता है। कांगेर घाटी की यह अनोखी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक गुफाएं इसे विश्व धरोहर के योग्य बनाती हैं।





