Farmers Are Worried: धान बेचा, पैसा अटका, बैंक लिमिट ने बढ़ाई किसानों की परेशानी
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, लेकिन नकदी के लिए तरसते किसान....

समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के लिए राहत की जगह परेशानी बढ़ती जा रही है। (Farmers Are Worried) बैंक लिमिट और नकदी संकट ने किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि किसानों के खाते में पूरी रकम आने के बावजूद उन्हें एक बार में सिर्फ 50 हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं। धान बेचने के अगले ही दिन भुगतान तो खाते में डाल दिया जाता है, लेकिन नकद निकालने के लिए किसानों को कई-कई दिनों तक बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
नकदी के लिए तरसते किसान….
बैंकों में नकदी की भारी कमी और रोज़ाना भुगतान सीमा के कारण किसान अपनी ही मेहनत की कमाई समय पर नहीं पा रहे हैं। (Farmers Are Worried) किसानों का कहना है कि सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर धान खरीदने का दावा कर रही है, लेकिन अभी उन्हें पूरी राशि नहीं मिल रही। फिलहाल सिर्फ 2369 और 2379 रुपये प्रति क्विंटल की रकम ही खाते में डाली जा रही है, जबकि शेष 731 रुपये बाद में मिलने की बात कही जा रही है।
खाद, बीज, मजदूरी और घरेलू जरूरतों के लिए किसानों को तुरंत नकदी चाहिए, लेकिन बैंक लिमिट उनकी राह में रोड़ा बन गई है। जिले में रोज़ाना भुगतान की सीमा लगभग 15 करोड़ रुपये तय होने से प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसान आज नकदी संकट से जूझ रहे हैं और शासन-प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।





