करेंसी नोटों से गांधी की तस्वीर हटाने की तैयारी का दावा, CPI सांसद ने सरकार पर लगाया आरोप

भारतीय मुद्रा से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया है कि केंद्र सरकार भारतीय करेंसी नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि इस दिशा में शुरुआती स्तर पर योजनाएं बन चुकी हैं और गांधी की जगह देश की विरासत को दर्शाने वाले अन्य प्रतीकों को लाने पर चर्चा चल रही है।
जॉन ब्रिटास का यह आरोप ऐसे समय सामने आया है, जब मनरेगा के नाम में बदलाव को लेकर पहले से ही विपक्ष सरकार पर गांधी के नाम और विचारधारा को हाशिये पर डालने का आरोप लगा रहा है। सांसद ने कहा कि आधिकारिक स्तर पर इनकार के बावजूद उच्च स्तर पर इस विषय पर चर्चा हो चुकी है और यह केवल अफवाह नहीं है। उनके मुताबिक, यह देश के प्रतीकों को दोबारा परिभाषित करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।
भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही इस तरह के दावों को खारिज करता रहा है। RBI ने साफ कहा है कि भारतीय करेंसी नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने या किसी अन्य हस्ती की तस्वीर लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। 2022 में भी केंद्रीय बैंक ने उन रिपोर्ट्स को नकार दिया था, जिनमें गांधी की जगह अन्य महान व्यक्तित्वों की तस्वीरें लगाने की बात कही गई थी।
गौरतलब है कि 1996 में महात्मा गांधी सीरीज के नोट जारी होने के बाद से गांधी की तस्वीर सभी भारतीय बैंकनोट्स की पहचान बन चुकी है। इसके बावजूद इस मुद्दे पर समय-समय पर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं।
इसी बयान के दौरान जॉन ब्रिटास ने प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित एक टी पार्टी में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष के बीच इस तरह के आयोजनों में शामिल होना विपक्ष की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। ब्रिटास ने यह भी टिप्पणी की कि रोजगार से जुड़े कानूनों में बदलाव से गरीबों पर असर पड़ेगा और ऐसे समय में सत्ता पक्ष के कार्यक्रमों में भागीदारी लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है।
कुल मिलाकर, गांधी की तस्वीर को लेकर दिया गया यह बयान राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है, जबकि आधिकारिक एजेंसियां इस तरह के किसी भी बदलाव से इनकार करती रही हैं।




