छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में मिलेगा समान अधिकार, बेटों जैसा हक तय

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि अब बेटियां भी अपने पिता की पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार रखती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के तहत बेटियां भी “सह-उत्तराधिकारी” मानी जाएंगी, और उन्हें परिवार की पैतृक संपत्ति में बराबरी का हक प्राप्त है।
यह फैसला बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक ऐसे केस की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें परिवार में पैतृक जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। मामले में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उसके पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति का पूरा अधिकार केवल बेटों को दिया गया, जबकि बेटियों को इससे वंचित रखा गया।
हाईकोर्ट का अवलोकन:
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “भारत में संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं, इसलिए अब बेटियों को संपत्ति से वंचित रखना सामाजिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से गलत है।” कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि 2005 के संशोधन के बाद बेटियां अपने पिता की संपत्ति में उसी प्रकार की हिस्सेदार हैं जैसे बेटे होते हैं, भले ही पिता का निधन संशोधन के बाद हुआ हो या पहले।
निर्णय का प्रभाव:
इस फैसले का असर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में समान मामलों पर पड़ सकता है। यह महिलाओं के उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों को और अधिक मजबूत बनाएगा। अदालत ने निचली अदालतों को भी निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में बेटियों के अधिकार को प्राथमिकता के साथ देखा जाए।
कानूनी विशेषज्ञों की राय:
कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला समाज में लैंगिक समानता की दिशा में एक और बड़ा कदम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खास तौर पर उन बेटियों को न्याय मिलेगा, जिन्हें अक्सर पारिवारिक संपत्ति से बाहर रखा जाता था।





