छोटे परमाणु रिएक्टर बना रहा भारत, जहां चाहें वहां कर सकेंगे स्थापित

दिल्ली। भारत स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में अग्रणी बनने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी दिशा में देश में 200 मेगावाट तक के छोटे आकार वाले परमाणु रिएक्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन रिएक्टरों को वाणिज्यिक जहाजों सहित किसी भी स्थान पर स्थापित किया जा सकेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परमाणु ऊर्जा, परमाणु विखंडन से उत्पन्न ऊष्मा द्वारा पैदा होती है, जिससे बिजली का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के वैज्ञानिक 55 मेगावाट और 200 मेगावाट के दो छोटे परमाणु रिएक्टर विकसित कर रहे हैं। इन्हें उच्च ऊर्जा की जरूरत वाली कंपनियों के कैप्टिव पावर प्लांट में भी लगाया जा सकता है।
अधिकारी ने बताया कि ये रिएक्टर बहुत सुरक्षित हैं और मर्चेंट नेवी के जहाजों में भी इनका उपयोग किया जा सकेगा। ये रिएक्टर भारत स्माल माड्यूलर रिएक्टर (BSMR) के रूप में देश में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का मुख्य आधार बनेंगे। वर्तमान में भारत के पास दो स्वदेश निर्मित परमाणु पनडुब्बियां, INS अरिहंत और INS अरिघात हैं, जो 83 मेगावाट के रिएक्टरों से संचालित होती हैं। तीसरी पनडुब्बी, INS अरिधमान का परीक्षण चल रहा है।
सरकार ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों को प्रवेश देने के लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 में संशोधन की योजना बनाई है। इसके तहत निजी कंपनियों को संयंत्र संचालन और परमाणु ईंधन चक्र के प्रारंभिक चरण को संभालने की अनुमति दी जा सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए निजी कंपनियों को विदेश से ईंधन खरीदने और खर्च किए गए ईंधन को वापस मूल देश भेजने की अनुमति भी दी जाएगी। यह पहल भारत को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर और सतत विकास की दिशा में अग्रसर करेगी।





