सड़क के अभाव में गर्भवती महिला को 10 किलोमीटर खाट पर उठाकर पहुंचाया अस्पताल

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सड़क सुविधा न होने के कारण एक गर्भवती महिला को खाट पर बैठाकर 10 किलोमीटर पैदल अस्पताल ले जाना पड़ा। कोंटा ब्लॉक के दंतेशपुरम गांव में मंगलवार को सात माह की गर्भवती महिला माड़वी सोमडी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव में सड़क न होने और एंबुलेंस न पहुंच पाने की वजह से ग्रामीणों ने महिला को खटिया पर बैठाकर पहाड़ी रास्तों से पैदल एलाड़मड़गु तक पहुंचाया। वहां से बाइक एंबुलेंस के जरिये उसे कोंटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार महिला की हालत अब स्थिर है।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव में मितानिन कार्यकर्ता रहती थी, लेकिन अब कोई स्वास्थ्य प्रतिनिधि नहीं है। न स्वास्थ्य विभाग समय पर पहुंचता है और न ही कोई अन्य सुविधा उपलब्ध होती है। महिला के पति मांड़वी मसा ने कहा कि “प्रशासन को अब जागना चाहिए, सड़क और स्वास्थ्य की समस्या को जल्द हल किया जाए।” वहीं महिला के भाई हेमंत कुमार ने कहा कि “बहन को पहाड़ी रास्तों से उठाकर ले जाना बेहद कठिन था, जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”
यह घटना न सिर्फ सड़क की कमी को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को भी सामने लाती है। बताया जा रहा है कि गछ्छनपल्ली उप स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक एएनएम पदस्थ है, जबकि दंतेशपुरम की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है।
इधर, बीजापुर और सुकमा दोनों जिलों में सड़क, स्वास्थ्य, बिजली और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि प्रशासन की ओर से समय-सीमा बैठकों में इन योजनाओं की समीक्षा की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार की गति बेहद धीमी है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी। यह मामला सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी है कि विकास योजनाओं का लाभ सबसे दूरस्थ इलाकों तक पहुंचना जरूरी है।





