धान खरीदी से पहले संकट: 6 हजार किसान अब भी सिस्टम से बाहर

बिलासपुर। धान खरीदी का सीजन नजदीक आते ही किसानों की चिंता बढ़ गई है। सरकार ने इस बार साफ कर दिया है कि केवल वही किसान मंडी में धान बेच पाएंगे जिनका नाम एग्रीस्टेक पोर्टल पर दर्ज होगा। लेकिन जिले के करीब 6 हजार किसान अब भी इस पोर्टल से बाहर हैं। तकनीकी गड़बड़ियों और सर्वर की समस्या ने किसानों की नींद उड़ा दी है।
बिलासपुर जिले में लगभग 1 लाख 25 हजार किसान हैं, जिनमें से 6 हजार का पंजीयन अब तक पूरा नहीं हो सका है। किसान रोज चॉइस सेंटर और समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर जगह एक ही जवाब—“सर्वर डाउन है।” कई किसान ओटीपी के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं, तो कुछ के खातों में अधूरी जानकारी दर्ज हो रही है। जिन किसानों की दो जगह जमीन है, उनकी एक ही जमीन पोर्टल में दिखाई दे रही है।
किसानों का आरोप है कि सरकारी दफ्तरों में जिम्मेदारी तय नहीं है। समितियां किसानों को चॉइस सेंटर भेज देती हैं, और वहां से उन्हें सहकारिता विभाग लौटाया जाता है। किसान सवाल उठा रहे हैं—“हम मेहनत करें, फसल उगाएं, और अब बेचने में भी अटक जाएं?”
भू अभिलेख अधीक्षक सोमेश्वर यादव ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर सभी तहसीलदार, पटवारी और समिति प्रभारी मिलकर पंजीयन कार्य तेज़ी से पूरा करेंगे। 31 अक्टूबर तक सभी किसानों का नाम पोर्टल में दर्ज करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या समय पर सभी किसानों का पंजीकरण पूरा हो पाएगा या इस बार भी सिस्टम की खामियों के कारण मेहनतकश किसान अपनी फसल बेचने से वंचित रह जाएंगे?





