बस्तर के नक्सल पीड़ित बोले, सलवा-जुड़ूम पर रोक से हालात बिगड़े, अपनों को खोया
सांसदों से की अपील- सुदर्शन को समर्थन न दें

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल हिंसा झेल चुके पीड़ितों ने सांसदों से अपील की है कि वे उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को समर्थन न दें। उनका आरोप है कि 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सलवा जुडूम आंदोलन पर लगाई गई रोक ने नक्सलियों को मजबूत किया और हजारों निर्दोष लोग हिंसा का शिकार बने।
बस्तर शांति समिति के बैनर तले इकट्ठा हुए आदिवासियों ने कहा कि सलवा जुडूम ने नक्सलियों को कमजोर कर दिया था, लेकिन रेड्डी के फैसले ने हालात बिगाड़ दिए। पीड़ितों का कहना है कि यह निर्णय दिल्ली के दबाव में लिया गया और बस्तर की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया गया।
नक्सल पीड़ितों ने अपने दर्दभरे अनुभव साझा किए। दिव्यांग बने सियाराम रामटेके बोले कि अगर आंदोलन पर रोक न लगती तो वे स्वस्थ होते। केदारनाथ कश्यप ने बताया कि उनके भाई की हत्या इसी फैसले के बाद हुई। शहीद मोहन उइके की पत्नी ने कहा कि उनके पति की शहादत को भुला दिया गया। महादेव दूधु ने याद दिलाया कि दंतेवाड़ा बस हमले में 32 लोग मारे गए, वे जिंदा तो बचे पर एक पैर गंवा बैठे।
समिति के सदस्य जयराम और मंगऊ राम कावड़े ने बताया कि हजारों पीड़ित परिवारों ने सांसदों को चिट्ठियां लिखी हैं। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति के फैसले से बस्तर नरक बना, उसे उपराष्ट्रपति पद पर बैठाना पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। यह विवाद एक बार फिर उस बहस को सामने लाता है कि सलवा जुडूम ने नक्सलवाद के खिलाफ जमीनी लड़ाई लड़ी या फिर उसने आदिवासियों के मानवाधिकारों को चोट पहुंचाई। फिलहाल, बस्तरवासी सांसदों से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।





