जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव मंजूर, 3 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लोकसभा में मंगलवार को महाभियोग प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया। स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें रविशंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता समेत 146 सांसदों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव मिला। आरोपों को गंभीर मानते हुए उन्होंने जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी गठित की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य शामिल हैं।

मामला 14 मार्च के “कैश कांड” से जुड़ा है, जब जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद 500-500 के अधजले नोटों की गड्डियां मिली थीं। बाद में नोट रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। सीजेआई की सिफारिश और प्रारंभिक जांच में आरोप गंभीर पाए जाने पर यह कदम उठाया गया। स्पीकर बिरला ने कहा कि भ्रष्टाचार के संकेत मिलने और न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में बेदाग चरित्र ही जनता के विश्वास की नींव है।

स्वतंत्र भारत में अब तक छह बार जजों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाए गए हैं, लेकिन किसी को भी इस प्रक्रिया से पद से नहीं हटाया गया। जस्टिस वी. रामास्वामी (1993) से लेकर सीजेआई दीपक मिश्रा (2018) तक के मामलों में या तो प्रस्ताव खारिज हुए या जजों ने इस्तीफा दे दिया। जांच समिति की रिपोर्ट आने तक प्रस्ताव लंबित रहेगा। अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो यह देश में जज के खिलाफ महाभियोग से पदच्युत होने का पहला मामला हो सकता है।

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