यूडाइस कोड से खुली फिजूलखर्ची, शिक्षा विभाग को 50 करोड़ की बचत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली से दसवीं तक के छात्रों को हर साल मुफ्त किताबें दी जाती हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में लंबे समय से भारी फिजूलखर्ची हो रही थी। पाठ्य पुस्तक निगम अब तक शिक्षा विभाग से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर लगभग 54 लाख किताबें छापता था, जिस पर करीब 150 करोड़ रुपए खर्च होते थे।
इस साल निगम ने यूडाइस कोड के माध्यम से छात्रों की वास्तविक संख्या पता की तो बड़ा अंतर सामने आया। राज्य में केवल 43 लाख छात्र-छात्राएं पाए गए, यानी पिछले आंकड़ों से 11 लाख कम। इसी आधार पर इस बार किताबें छापी गईं, जिससे मात्र 100 करोड़ रुपए खर्च हुए और करीब 50 करोड़ की सीधी बचत हुई।
यूडाइस कोड से हर स्कूल का पूरा ब्योरा मिलता है, जिसमें कक्षा-वार छात्रों की संख्या भी शामिल होती है। पहले शिक्षा विभाग से औसत आंकड़े भेजे जाते थे, जिसके कारण सालों तक जरूरत से ज्यादा किताबें छापी जाती रहीं। किताबों की छपाई और सप्लाई की प्रक्रिया एक साल पहले ही शुरू हो जाती है। जुलाई में तैयारी, अक्टूबर-नवंबर में टेंडर, दिसंबर से छपाई और मार्च से सप्लाई। इसी वजह से विभाग अक्सर अनुमानित आंकड़े भेज देता था।
इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। पाठ्य पुस्तक निगम के जीएम डिगेश पटेल ने कहा कि यूडाइस कोड से सही संख्या मिलने से न केवल खर्च कम हुआ, बल्कि पेपर की कीमत घटने का भी लाभ मिला। यह कदम न केवल सरकारी धन की बचत का उदाहरण है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक अहम बदलाव भी माना जा रहा है।





