CG Government School Crisis 2025 : छत्तीसगढ़ में राजस्थान के झालावाड़ जैसे 5 हज़ार स्कूल…
CG Government School Crisis 2025 : छत्तीसगढ़ में जर्जर स्कूलों की भयावह स्थिति,बस्तर संभाग: सबसे खराब हालात, बिलासपुर संभाग और अन्य जिलों की स्थिति,अन्य जिलों में भी हालात गंभीर,आदिवासी अंचलों में शिक्षा भगवान भरोसे, क्या छत्तीसगढ़ अगला राजस्थान बनेगा?

रायपुर/ CG Government School Crisis 2025 : हाल ही में राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में एक सरकारी स्कूल की जर्जर छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ में भी ऐसा ही हादसा हो सकता है? क्योंकि यहाँ भी हज़ारों स्कूल जर्जर हालत में हैं और बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में जर्जर स्कूलों की भयावह स्थिति
छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बने 25 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 5000 से ज़्यादा सरकारी स्कूल जर्जर हालत में हैं। इनमें से कई इमारतें इतनी जर्जर हालत में हैं कि किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
राज्य सरकार ने पहले स्कूल भवनों की मरम्मत और निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। कुछ ज़िलों में काम शुरू भी हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते मौजूदा सरकार ने काम रुकवाकर जाँच प्रक्रिया शुरू कर दी। इस वजह से आज भी हज़ारों स्कूल मरम्मत का इंतज़ार कर रहे हैं। (CG Government School Crisis 2025)
बस्तर संभाग: सबसे बदतर हालत
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्कूलों की हालत सबसे ज़्यादा चिंताजनक है। यहाँ के सात ज़िलों के 1,542 स्कूल जर्जर हैं।
– बस्तर ज़िले में 546 स्कूल
– कोंडागाँव में 303
– कांकेर में 377
– बीजापुर में 117
– सुकमा में 124
– दंतेवाड़ा में 51
– नारायणपुर में 22
इन स्कूलों में कई बार छत गिरने जैसी घटनाएँ हो चुकी हैं, लेकिन अब भी बच्चे पानी टपकते कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।(CG Government School Crisis 2025)
बिलासपुर संभाग और अन्य ज़िलों का हाल
बिलासपुर संभाग में 2,200 से ज़्यादा स्कूल जर्जर हैं।
-कोरबा में 645 स्कूल (225 अत्यंत जर्जर, 8 भवनहीन)
-रायगढ़ में 424 स्कूल (130 अत्यंत जर्जर, 23 भवनहीन)
-बिलासपुर में 593 स्कूल (242 अत्यंत जर्जर, 22 भवनहीन)
-जीपीएम में 135 स्कूल (70 अत्यंत जर्जर, 5 भवनहीन)
-सक्ती में 117 जर्जर स्कूल
-मुंगेली और जांजगीर में 80 से ज़्यादा स्कूल भवनहीन
इन स्कूलों की छतें टपकती हैं, दीवारों से प्लास्टर गिरता है और फर्श पर पानी भर जाने पर बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है।
अन्य ज़िलों में भी स्थिति गंभीर है (CG Government School Crisis 2025)
-राजनांदगांव में 531 स्कूल जर्जर हैं**, जिनमें से 70-80 को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। लेकिन अभी तक कोई राशि स्वीकृत नहीं हुई है।
-बालोद में दो स्कूल 13 महीने पहले क्षतिग्रस्त हो गए थे**, लेकिन मरम्मत के लिए अभी तक राशि नहीं मिली है।
-1.5 करोड़ रुपये की मांग बेमेतरा में आत्मानंद स्कूल और एक बेसिक स्कूल के लिए तीन बार 1.70 करोड़ रुपये का बजट पारित हो चुका है, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली।
आदिवासी इलाकों में शिक्षा भगवान भरोसे है।
कवर्धा और बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में स्कूल भवनों की हालत इतनी खराब है कि पढ़ाई पंचायत भवनों, सामुदायिक केंद्रों या खुले में हो रही है। यहाँ सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएँ पूरी तरह से नदारद हैं।
यह सिर्फ़ चेतावनी नहीं, बल्कि खतरे की घंटी है।
आज राजस्थान में जो हुआ, वह कल छत्तीसगढ़ में भी हो सकता है। अगर अब भी स्कूलों की हालत नहीं सुधारी गई, तो यहाँ भी कोई बड़ा हादसा होना तय है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन अब भी यही कहेगा कि यह “दुर्घटना” थी?
यह चेतावनी को गंभीरता से लेने का समय है। बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। वरना यह लापरवाही किसी दिन हमें वही मंज़र दिखा सकती है जो हमने झालावाड़ में देखा था।(CG Government School Crisis 2025)





