गरीबी का दंश: शव ले जाने वाहन नहीं मिला, जमीन गिरवी रखनी पड़ी

बलरामपुर। सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। बलरामपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजपुर से एक तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है। ग्राम पंचायत करवा निवासी अति संरक्षित कोड़ाकू जनजाति के एक युवक को सांप ने काट लिया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन मौत के बाद उसकी लाश को घर ले जाने के लिए शव वाहन तक उपलब्ध नहीं हो सका।
मृतक के परिजन अस्पताल प्रशासन से शव वाहन की मांग करते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। मजबूरी में परिजनों ने गांव से एक पिकअप वाहन मंगाया, जिसकी दूरी महज 10 किलोमीटर थी, लेकिन किराया 2000 रुपए मांगा गया। किराया भरने के लिए परिजन इतने मजबूर हैं कि उन्हें अपनी जमीन गिरवी रखने की बात तक कहनी पड़ी। कुछ परिजनों ने यह भी कहा कि वह धीरे-धीरे पैसे चुकता करेंगे।
डॉक्टरों ने सफाई दी कि मृतक के परिजन अपने सुविधा अनुसार शव ले जाने की व्यवस्था करते हैं। यह जवाब संवेदनहीनता की मिसाल बन गया। यह घटना बताती है कि किस तरह दूर-दराज इलाकों में आदिवासी समुदाय के लोग न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीवन गंवा रहे हैं, बल्कि मौत के बाद भी सरकारी संवेदना से वंचित रह जाते हैं।





