सारंगढ़-बिलाईगढ़: किसानों के लिए खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था, कलेक्टर ने दिए सतत निगरानी के निर्देश

सारंगढ़ भिलाईगड़:खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को समय पर और गुणवत्तायुक्त खाद-बीज उपलब्ध कराने की तैयारियां तेज़ हो गई हैं। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी सहकारी समितियों की लगातार निगरानी की जाए, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
जिले में कितनी खाद-बीज उपलब्ध है?
इस समय जिले की 65 सहकारी समितियों में
15,957 टन खाद का भंडारण हो चुका है
(जिसमें डीएपी, यूरिया, सुपर फॉस्फेट, एनपीके, पोटाश शामिल हैं)।
इनमें से अब तक 12,189 टन खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है।
करीब 3,767 टन खाद अभी भी उपलब्ध है।
वहीं बीज की बात करें तो:
20,601 क्विंटल धान बीज (स्वर्णा, एमटीयू, पीकेवी आदि किस्में) स्टोर किया गया है।
अब तक 18,704 क्विंटल बीज वितरित हो चुका है।
1,897 क्विंटल बीज अभी भी वितरण के लिए स्टॉक में है।
डीएपी की कमी और उसका विकल्प
कृषि विभाग ने पहले ही डीएपी की कमी की संभावना जताई थी। इस स्थिति में कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को एक आसान विकल्प सुझाया है:
आधा बोरी यूरिया + 3 बोरी सुपर फॉस्फेट (SSP) + 20 किलो पोटाश (MOP)
इसका उपयोग डीएपी के स्थान पर किया जा सकता है।
समितियों में एसएसपी और पोटाश की भरपूर मात्रा में उपलब्धता है, और फसलों की जरूरत के अनुसार यूरिया भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
नैनो डीएपी से होगा फायदा
किसानों को सलाह दी गई है कि वे नैनो डीएपी से बीज उपचार करें।
केवल 5 मिलीलीटर नैनो डीएपी प्रति किलो बीज की जरूरत होती है।
इससे बीज का स्वस्थ अंकुरण होता है और अच्छी फसल मिलती है।
सख्त निगरानी, नकली खाद पर रोक
कलेक्टर ने सभी एसडीएम, तहसीलदार और कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निजी खाद-बीज विक्रेताओं की सख्ती से जांच करें, ताकि कहीं भी काला बाज़ारी या नकली खाद की बिक्री न हो।
इसके लिए जिले में संयुक्त टीम बनाकर हर विकासखंड में निरीक्षण जारी है।
किसानों के लिए अपील
उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव ने किसानों से अपील की है कि जो किसान अब तक खाद या बीज नहीं ले पाए हैं, वे जितनी जल्दी हो सके अपनी नजदीकी समिति से खाद-बीज ले लें।
साथ ही नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की मांग भी करें, ताकि उन्हें केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सके।
सरकार की यह पहल किसानों को समय पर संसाधन देने और उनकी फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगी।





