Talpuri Housing Scheme Scam: जिस अधिकारी पर आरोप उसी को दी गई जांच की जिम्मेदारी
Talpuri Housing Scheme Scam: प्रक्रिया पर सवाल?

रायपुर। तालपुरी आवासीय योजना में हुए कथित घोटाले को लेकर जांच के आदेश तो दिए गए हैं(Talpuri Housing Scheme Scam) लेकिन इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गृह निर्माण मंडल से संबंधित फाइलों की जांच करने को कहा है, लेकिन मंडल ने बड़ी लापरवाही दिखाते हुए जिस अधिकारी पर खुद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, उसी को जांच का जिम्मा सौंप दिया।
जिस पर आरोप उसी को जांच अधिकारी बना दिया गया
बताया जा रहा है कि जिस अधिकारी के खिलाफ जांच होनी थी, उसी के हस्ताक्षर से अब विभिन्न विभागों को जांच के आदेश भेजे जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कोई छोटा कर्मचारी या अधिकारी अपने ही वरिष्ठ अधिकारी की निष्पक्ष जांच कैसे करेगा?
नीतियों के खिलाफ जाकर मिली पदोन्नति, Talpuri Housing Scheme Scam
गृह निर्माण मंडल ने न सिर्फ नियमों की अनदेखी की, बल्कि जिन अधिकारियों पर पहले से ही भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत हैं, उन्हें लगातार प्रमोशन और पदोन्नति भी दी जा रही है। शासन की स्पष्ट नीति है कि जब तक किसी अधिकारी की जांच लंबित हो, तब तक उसे प्रमोशन नहीं मिल सकता। फिर भी नियमों को ताक पर रखकर ऐसा किया गया।
घोटाले से जुड़ी फाइलें हुईं गायब, FIR तक नहीं दर्ज
Talpuri Housing Scheme Scam: तालपुरी प्रकरण में टेंडर 2008 में मंजूर हुआ था, लेकिन 2010 में बिना तकनीकी स्वीकृति के कार्य आदेश जारी किया गया। इसके बाद टेंडर की शर्तें बदली गईं और बिना नियमों का पालन किए करीब 550 भवनों का निर्माण किया गया। इतना ही नहीं, घटिया सामग्री का इस्तेमाल होने के बावजूद ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया।
जांच से जुड़े दस्तावेजों के मुख्यालय से गायब होने की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन अब तक इस पर कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। जांच अधिकारी का कहना है कि पूरा फाइल ही चोरी हो चुका है।
जनता की गाढ़ी कमाई लूटने का आरोप
आरोप है कि इस घोटाले से गरीब जनता और शासन का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। योजना में 132 एकड़ ज़मीन को लेकर कई अनियमितताएं सामने आई हैं। ठेकेदारों को समय बढ़ाकर भुगतान किया गया, जबकि उन्हें समय पर काम पूरा न करने पर पेनाल्टी लगनी थी।
Talpuri Housing Scheme Scam: लोगों का कहना है कि अगर सही तरीके से, बाहर के या वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराई जाए, तो कई भ्रष्ट अधिकारी जेल के पीछे होंगे। लेकिन जब जांच उन्हीं के हाथों में है जिन पर आरोप हैं, तो सच सामने आना मुश्किल लगता है।
कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस विचारधारा के कुछ अधिकारी जानबूझकर वर्तमान भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए जांच की दिशा को भटका रहे हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि इस गंभीर मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उन्हें जांच से दूर रखा जाए और जनता के पैसों की पूरी भरपाई की जाए।





