बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर विकास को ब्रेक, भ्रष्टाचार के आरोपों से थमा काम

बिलासपुर। कभी बड़े-बड़े वादों और योजनाओं से घिरा बिलासपुर रेलवे स्टेशन आज विकास की राह में पिछड़ता नजर आ रहा है। अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन के गेट नंबर 2 से 4 तक री-डेवलपमेंट का काम शुरू होना था, लेकिन कुछ शुरुआती गतिविधियों के बाद काम ठप हो गया। न कहीं निर्माण कार्य दिख रहा है, न ही यात्रियों को कोई सुविधा मिल रही है। स्टेशन पर केवल अधूरी घेराबंदी और अव्यवस्था का आलम है।
छोटे स्टेशन बन रहे मॉडर्न, मुख्यालय बना इंतज़ार का प्लेटफॉर्म
बिलासपुर रेलवे ज़ोन के तहत जहां चिरमिरी, अकलतरा और कोरबा जैसे छोटे स्टेशन तेजी से नया रूप ले रहे हैं, वहीं जोनल मुख्यालय बिलासपुर रेलवे स्टेशन खुद विकास की बाट जोह रहा है। स्टेशन का मुख्य परिसर वीरान पड़ा है और वहां कोई काम होता नहीं दिख रहा।
स्टेशन के री-डेवलपमेंट का ठेका झांझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को दिया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही काम रुक गया। सूत्रों के मुताबिक, निर्माण एजेंसी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं, जिसके कारण रेलवे ने प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है। यह मामला सांसदों की बैठक में भी उठा, लेकिन रेलवे अधिकारियों ने इससे बचने की कोशिश की।
रेलवे का दावा और जमीनी हकीकत में फर्क
रेल मंडल के वरिष्ठ डीसीएम अनुराग कुमार सिंह ने दावा किया है कि स्टेशन के बाहरी हिस्सों में काम चल रहा है और एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि मुख्य स्टेशन क्षेत्र अब तक खाली क्यों पड़ा है? क्या रेलवे प्रबंधन की प्राथमिकता सूची से बिलासपुर स्टेशन बाहर हो गया है?
यात्रियों की परेशानी और प्रशासन की चुप्पी
हर दिन हजारों यात्री स्टेशन की अव्यवस्था और अधूरे निर्माण के बीच सफर करने को मजबूर हैं। विकास के नाम पर जो वादे किए गए थे, वे अब सवाल बनकर सामने खड़े हैं। स्टेशन की खामोशी अब चर्चा का विषय बन चुकी है – और जवाब मांग रही है।





