सारंगढ़-बिलाईगढ़: विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर लिया गया नशामुक्ति का संकल्प, तंबाकू छोड़ने वालों को मिला सम्मान

सारंगढ़-बिलाईगढ़। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एफ. आर. निराला के मार्गदर्शन में विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जिले में एक विशेष अभियान चलाया गया। इस बार की थीम थी – “तंबाकू और निकोटीन उत्पादों पर उद्योग की रणनीति को उजागर करना”।
इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी लोगों को तंबाकू छोड़ने की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही उन लोगों को सम्मानित भी किया गया, जिन्होंने सारंगढ़ के तंबाकू नशामुक्ति केंद्र में काउंसलिंग लेकर और निकोटीन पैच की मदद से तंबाकू और गुड़ाखू जैसी आदतों को छोड़ दिया है। उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में कुछ हितग्राहियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले वे दांत और मसूड़ों के दर्द के कारण गुड़ाखू का सेवन करते थे, लेकिन डेंटिस्ट के समझाने पर उन्होंने फरवरी से इसे पूरी तरह छोड़ दिया है।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि तंबाकू में पाया जाने वाला निकोटीन शरीर के अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में थोड़ी राहत जरूर मिलती है, लेकिन यह आदत जल्द ही लत में बदल जाती है।
तंबाकू दो तरह से इस्तेमाल किया जाता है –
1. धुआं युक्त (जैसे बीड़ी, सिगरेट, हुक्का) – जिससे फेफड़े बुरी तरह प्रभावित होते हैं और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
2. धुआं रहित (जैसे गुटखा, खैनी, गुड़ाखू) – जिससे मुंह में घाव, अल्सर और कैंसर हो सकता है। लंबे समय तक सेवन से मुंह खुलना भी मुश्किल हो जाता है, जिसे “छोटा मुंह” कहा जाता है।
तंबाकू का सेवन करने वालों में भूख कम लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, ज्यादा पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जो हाई ब्लड प्रेशर और गंभीर बीमारियों का संकेत हैं।
महिलाएं भी तंबाकू के प्रभाव से अछूती नहीं हैं। चाहे वे खुद सेवन करें या घर में किसी और के धुएं के संपर्क में आएं, इससे गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पुरुषों में नपुंसकता और दांतों का पीलापन आम समस्या बन जाती है।
कार्यक्रम में सभी लोगों से अपील की गई कि वे तंबाकू और इससे जुड़े सभी उत्पादों से दूरी बनाएं और एक स्वस्थ, सभ्य और सुरक्षित समाज के निर्माण में योगदान दें।





