big news: सांप के काटने से मौत बताकर शव को दफनाया, 18 महीने बाद अब फोरेंसिक टीम करेगी जांच

big news: बिलासपुर। बिलासपुर के बिल्हा थाना क्षेत्र में वो पुराना मामला फिर ज़िंदा हो गया है, जिसे ‘सांप ने काटा’ कहकर दफना दिया गया था। लेकिन कहते हैं, ज़मीन निगल जाए या आसमान गिर पड़े, सच्चाई एक दिन बाहर आ ही जाती है — और इस बार तो वो कब्र से निकलकर सिम्स की मर्च्युरी में सीधी फोरेंसिक टेबल पर पहुंच गई है। 18 महीने पहले जिस मौत को “कुदरती” बताया गया था, अब उस पर शक की इतनी परतें चढ़ गई हैं कि पोस्टमार्टम का नाम अब ‘पोस्ट-फैक्टो इन्वेस्टिगेशन’ रख देना चाहिए।
नवंबर साल 2023 में शिवकुमार धृतलहरे की मौत हुई। कहा गया, सांप ने काटा… लेकिन पुलिस की जांच में न सांप मिला, न डंसने का ठोस सबूत। डॉक्टरों के बयान कुछ और, परिजन बोले कुछ और। मामला ऐसा उलझा कि प्रशासन को आखिरकार “ढांचे का पोस्टमार्टम” करवाना पड़ा। शनिवार को कोर्ट की अनुमति से शव को कब्र से निकाला गया, जैसे कोई राज़दार खुद चलकर सामने आ रहा हो। सिम्स की मर्च्युरी में अब हड्डियाँ तय करेंगी कि मौत का कारण जहर था या इंसानियत की कोई साजिश।
फिलहाल सिम्स के डॉक्टर हड्डी दर हड्डी, कंकाल दर कंकाल सबूत तलाशने में लगे हैं, और पुलिस इस उम्मीद में बैठी है कि कभी तो आएगा फोरेंसिक का वो रिपोर्ट कार्ड, जो बताएगा – ये मामला ‘नेचुरल डेथ’ था या ‘क्रिमिनल क्लासिक’। अब तक इस केस में वकील कामता प्रसाद साहू और डॉक्टर प्रियंका सोनी समेत कुछ नाम कानूनी गिरफ्त में आ चुके हैं, लेकिन असली खेल तो अब शुरू हुआ है। प्रशासन दावा कर रहा है कि जांच निष्पक्ष होगी — बस देखना ये है कि 18 महीने बाद भी क्या इंसाफ की साँसें बची हैं, या सिर्फ हड्डियाँ बोलेंगी और कानून सुनकर चुप रह जाएगा?





