दूषित पानी पर हाईकोर्ट सख्त, बिलासपुर और खैरागढ़ के अफसरों से मांगी रिपोर्ट

बिलासपुर। राज्य के शहरी क्षेत्रों में दूषित पेयजल की आपूर्ति और इसके कारण फैल रही बीमारियों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर और खैरागढ़ जैसे शहरों में पाइप लाइन लीकेज, अवैध कनेक्शन और सफाई के अभाव में नागरिकों को मिल रहा गंदा पानी अब कोर्ट की निगरानी में आ गया है।
बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के संत रविदास नगर वार्ड समेत कई इलाकों में नलों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आई हैं। इन क्षेत्रों में डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसको लेकर पहले से लंबित जनहित याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में सुनवाई हुई। नगर निगम आयुक्त ने शपथपत्र के जरिए अदालत को जानकारी दी कि लीकेज सुधारने, पाइपलाइन मरम्मत और अवैध कनेक्शन हटाने का कार्य चल रहा है। कोर्ट ने इस शपथपत्र को स्वीकारते हुए समयबद्ध व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
वहीं, खैरागढ़ में गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई को लेकर भी कोर्ट ने चिंता जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने राज्य सरकार से कड़ा सवाल करते हुए पूछा कि आखिर आम जनता को स्वच्छ पेयजल कब मिलेगा? अदालत ने खैरागढ़ नगर पालिका परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है। कोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।





