अव्यवस्थाओं से जूझता छत्तीसगढ़ का मानसिक चिकित्सालय, परिजन बोले– भगवान भरोसे चल रहा अस्पताल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ का एकमात्र मानसिक चिकित्सालय संस्थान बिलासपुर के सेंदरी में स्थित है, लेकिन एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह संस्थान बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। स्टाफ की भारी कमी, संसाधनों की अनुपलब्धता और अव्यवस्था के चलते अब मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
73 पद खाली, इलाज पर असर
वर्तमान में अस्पताल में डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, आया और मनोचिकित्सक के 73 पद खाली हैं। स्टाफ की इस कमी के चलते मरीजों की देखभाल पर सीधा असर पड़ रहा है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. प्रभु चौधरी का कहना है कि “अस्पताल में कोई अव्यवस्था नहीं है”, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट और परिजनों की बातों से अलग तस्वीर सामने आती है।
परिजनों की आपबीती
मरीज रामजी विश्वकर्मा के परिजन ने बताया कि अस्पताल में भोजन मेन्यू के अनुसार नहीं दिया जा रहा, और साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी परिजन खुद निभा रहे हैं। वहीं अमृत लाल चौहान, जो अपने रिश्तेदार के इलाज के लिए दूसरे जिले से आए हैं, उन्होंने बताया कि परिजनों के रुकने की व्यवस्था बेहद सीमित है। महिलाओं और पुरुषों के लिए सिर्फ 10-10 बेड उपलब्ध हैं और खाना बनाने के लिए कोई उचित किचन या कैंटीन मौजूद नहीं है।
खुले में चूल्हा, गंदगी में खाना
अस्पताल परिसर में एक शेड में ईंट के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर खाना बनाया जाता है, जहां पर गंदगी का आलम है और सफाई खुद परिजनों को करनी पड़ती है। ऐसे में मानसिक रूप से बीमार मरीजों की देखभाल के लिए आए लोगों को भी मानसिक और शारीरिक संघर्ष करना पड़ रहा है।
मरीजों की संख्या बढ़ी, सुविधाएं जस की तस
अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में 200 बेड की सुविधा है और प्रतिदिन 150 से अधिक ओपीडी मरीज आते हैं। वर्तमान में 170 मरीज भर्ती हैं। राज्य सरकार ने 100 और बेड बढ़ाने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की घोषणा तो की है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी, यह स्पष्ट नहीं है।
‘क्लोज वार्ड’ की चुनौती
अस्पताल में मरीजों को ‘ओपन’ और ‘क्लोज’ वार्ड में रखा जाता है। क्लोज वार्ड में वे मरीज होते हैं जिनके पास कोई परिजन नहीं होता। ऐसे मरीजों की देखभाल करना स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।





