बस्तर को मिला रेल कनेक्टिविटी का तोहफा: रावघाट–जगदलपुर परियोजना को केंद्र की मंजूरी

बस्तर
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए 9 मई 2025 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने रावघाट–जगदलपुर नई रेल परियोजना को मंजूरी दे दी। यह परियोजना बस्तर क्षेत्र को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
3513 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी 140 किलोमीटर लंबी रेल लाइन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लगभग 140 किमी लंबी रेललाइन का निर्माण किया जाएगा, जिस पर 3513 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सबसे खास बात यह है कि पूरी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी, जिससे राज्य को आर्थिक रूप से कोई अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव
“यह परियोजना बस्तर को विकास की नई पटरी पर दौड़ाएगी और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी।”
बस्तर के सामाजिक-आर्थिक विकास को मिलेगी रफ्तार
इस परियोजना से नारायणपुर और कोंडागांव जैसे पिछड़े और नक्सल प्रभावित जिले पहली बार भारतीय रेल मानचित्र पर दर्ज होंगे। यह न केवल स्थानीय आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार, कृषि और खनिज परिवहन के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
पर्यटन: चित्रकोट जैसे प्राकृतिक स्थलों तक पहुंचना होगा आसान
कृषि और उद्योग: किसानों और स्थानीय उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय बाजार
रोजगार: निर्माण और संचालन के दौरान हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार
खनिज परिवहन: बस्तर के समृद्ध खनिज भंडार को देश के अन्य हिस्सों तक ले जाना होगा संभव
भूमि अधिग्रहण अंतिम चरण में, जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य
जानकारी के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होने की संभावना है। इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक विकास दोनों ही दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
— स्थानीय जनप्रतिनिधि
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर अब उपेक्षा नहीं, अवसरों की भूमि बन रही है।”
एक ट्रांसपोर्ट लिंक नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा
यह परियोजना केवल एक रेलमार्ग नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शासन की सकारात्मक उपस्थिति और समावेशी विकास की दिशा में एक ठोस पहल है। अब बस्तर क्षेत्र में विकास की गूंज ट्रेन की सीटी के साथ गूंजेगी, और यह संदेश स्पष्ट होगा— “बस्तर अब जुड़ चुका है भारत की प्रगति की मुख्यधारा से।





