80 करोड़ की बिजली सुधार योजना बनी सिरदर्द, 5 महीने में सिर्फ 32% कार्य

बिलासपुर।
बिजली आपूर्ति को दुरुस्त करने और चोरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना धीमी प्रगति के कारण जिले के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।
80 करोड़ रुपये की लागत से इस योजना का जिम्मा पुणे की एसटी इलेक्ट्रिकल्स को सौंपा गया था, जिसे 6 महीनों में पूरा करना था। लेकिन 5 महीने बीतने के बावजूद सिर्फ 32% काम ही पूरा हो पाया है।
ट्रांसफार्मर पुराने, आपूर्ति ठप — बिजली व्यवस्था बदहाल
जिले में ट्रांसफार्मर लगातार खराब हो रहे हैं, लेकिन नए ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
47 स्थानों पर फीडर को छोटा करने का काम जारी है, लेकिन 82 किमी में से सिर्फ 61 किमी तक ही कार्य पूरा हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बस्ती और पंप लाइन को अलग करने की योजना भी अधूरी है — 45 में से सिर्फ 5 फीडरों का काम अंतिम चरण में है।
जुगाड़ से चल रही बिजली व्यवस्था, तारों पर टायर लपेटे गए
सिरगिट्टी स्वास्थ्य केंद्र के पास वार्ड क्रमांक 10 में बिजली विभाग की लापरवाही की एक बानगी देखी गई, जहां खराब तारों को बदलने के बजाय टायर लपेटकर जुगाड़ किया गया।
यह दृश्य बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
खुली तारों से खतरा, केबल बिछाने का लक्ष्य अधूरा
589 किलोमीटर एबी केबल बिछाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक सिर्फ 250 किमी तक ही कार्य हुआ है।
शहर में आज भी खुले तारों की भरमार है। हालिया आंधी में 27 जगह तार टूटे, जो यदि एबी केबल लगे होते तो रोका जा सकता था।
जिले में 20% लाइन लॉस हो रहा है, जिसे नई तकनीक से घटाया जा सकता था।
कार्यपालक निदेशक का बयान – बाधाएं जल्द दूर होंगी
बिजली विभाग के कार्यपालक निदेशक एके अंबष्ट ने बताया कि,
“काम की रफ्तार धीमी जरूर है, लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रगति में तेजी लाएं। ट्रांसफार्मर की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों को दूर करने की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं।”
454 ट्रांसफार्मरों की योजना के तहत अब तक सिर्फ 98 लगाए जा सके हैं।
कई जगह डीपी (डिस्ट्रिब्यूशन पॉइंट) तैयार हैं, लेकिन ट्रांसफार्मर की कमी के कारण काम अटका है।
जनता परेशान, गर्मी में बिजली व्यवस्था ने छोड़ा साथ
तेज गर्मी, बारिश और आंधी के दौर में ट्रांसफार्मरों के खराब होने से ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में बिजली संकट गहराया है।
जनता को जहां घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है, वहीं अधिकारी लक्ष्य अधूरा होने पर जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं।





