तिल्दा-खरोरा में खुलेआम सट्टे का खेल, करोड़ों का कारोबार, राजनेताओं का संरक्षण

रायपुर। राजधानी से सटे तिल्दा और खरोरा में इन दिनों खुलेआम सट्टे का खेल चल रहा है। ‘गणपति बुक’, ‘गजानंद बुक’ और ‘महादेव बुक’ जैसे नामों से ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टा धड़ल्ले से चल रहा है। बताया जा रहा है कि जिन लोगों को 1971 में पाकिस्तान से शरणार्थी बनाकर तिल्दा में बसाया गया था, अब वही लोग यहां करोड़ों का सट्टा कारोबार चला रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, तिल्दा में सट्टा कारोबार को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। कई छोटे-बड़े नेता इस अवैध धंधे को बचा रहे हैं। कुछ पार्षद खुद इस कारोबार में शामिल हैं और ऑनलाइन एप के जरिए करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। आईपीएल के सीजन में यह कारोबार और तेज़ हो जाता है, जिसमें रोजाना करोड़ों की सट्टा राशि का लेन-देन हो रहा है।
2016 में जहां सिर्फ कुछ गिने-चुने बुकी थे, वहीं अब पूरे जिले में 16 से ज्यादा बड़े बुकी काम कर रहे हैं जो देश-विदेश के सट्टेबाजों से जुड़े हुए हैं। पुलिस के लिए यह बड़ा सिरदर्द बन चुका है।
चौंकाने वाली बात यह है कि एक समय मूंग बड़ा बेचने वाला नंदू अब कांग्रेस के संरक्षण में गजानंद बुक के नाम से करोड़ों का सट्टा चला रहा है। उसका बेटा बबन इस सट्टा मामले में वांछित अपराधी है और फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सट्टे के जरिए इन लोगों ने इतनी संपत्ति बना ली है कि अब पुलिस और नेताओं को खुलेआम खरीदने का दावा करते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग पत्रकार बनकर भी इस धंधे को संरक्षण दे रहे हैं और आम जनता को गुमराह कर रहे हैं।
तिल्दा और खरोरा में इस वक्त सट्टा कारोबार पर कोई लगाम नहीं है, और यह छत्तीसगढ़ सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है।





