तालाब बना मुसीबत, 4 करोड़ की लागत से बना जोरापारा तालाब बना मैला गड्ढा

बिलासपुर। शहर के अरपापार इलाके में स्थित जोरापारा तालाब को 4 करोड़ रुपये की लागत से सरोवर धरोहर योजना के तहत सुंदर बनाया गया था, लेकिन आज यह तालाब रखरखाव की कमी के कारण बदहाल हो गया है।
तालाब में गंदगी और मच्छरों का अंबार है, जिससे आस-पास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। मोहल्ले वालों का कहना है कि मलेरिया, डेंगू और अन्य बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। सुबह टहलने आने वाले लोग भी मुंह पर रुमाल बांधकर चलने को मजबूर हैं।
तालाब के चारों ओर लगे फव्वारे, लाइटें, रास्ते और बैठने की जगहें सब खराब हो चुके हैं। रिटेनिंग वॉल भी टूट चुकी है। असामाजिक तत्वों ने लोहे की पाइप और दूसरी चीजें उखाड़ ली हैं। बच्चों के खेलने की जगह भी टूट-फूट गई है और बिजली के खंभे जर्जर हो गए हैं।
इस बारे में पार्षद श्याम साहू ने बताया कि जोरापारा और जांजी तालाब के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि पास हो चुकी है, लेकिन अभी राशि की स्वीकृति नहीं मिली है। प्रयास किया जा रहा है कि यह जल्दी मिल जाए।
जोरापारा की तरह तारबाहर के डीपूपारा और जतिया तालाब की हालत भी खराब है। इन तालाबों में नाले का गंदा पानी भर रहा है जिससे लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है।
हालांकि तोरवा हेमूनगर का बंधवा तालाब थोड़ी बेहतर हालत में है क्योंकि उसका रखरखाव एक निजी कंपनी को सौंपा गया है। इससे साफ है कि सिर्फ तालाबों को सजाना काफी नहीं, उनकी नियमित देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।





