12 घंटे तक एक साथ बंद रहे कुत्ता और तेंदुआ, लेकिन कुत्ते को नहीं लगाया हाथ, जानें वजह

कर्नाटक। आजादी हर किसी लिए अहम होती है चाहे वो इंसान हो या फिर कोई जानवर.. और साबित करती है भारत के कर्नाटक के कोम्बारू अभयारण्य में घटी एक घटना.. जहां एक कुत्ता और एक तेंदुआ लगभग 12 घंटे तक एक साथ बंद रहे.. लेकिन हैरानी की बात तो ये रही कि इन 12 घंटो में तेंदुए को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचाया और दोनों उस बाथरुम में अलग- अलग कोने पर बिना शोर मचाए बैठे रहे..
दरअसल हुआ कुछ युं था कि तेंदुआ कुत्ते का पीछा कर रहा था, कुत्ता बाहर से बंद बाथरुम में खिड़की के रास्ते बाथरूम में घुस गया.. जिसके पीछे-पीछे तेंदुआ भी घुस गया और दोनों एक साथ फंस गए…दोनों जानवर लगभग बारह घंटे तक अलग-अलग कोनों में एक साथ रहे.. लेकिन तेंदुए ने कुत्ते को खाने की कोशिश नहीं की..और कुत्ते ने भी भौंकने की भी हिम्मत नहीं की…
यद्यपि तेंदुआ भूखा था और कुत्ते का पीछा कर रहा था, फिर भी उसने उसे नहीं खाया। वह कुत्ते पर कूदकर खाना खा सकता था, लेकिन दोनों जानवर लगभग बारह घंटे तक अलग-अलग कोनों में एक साथ रहे। इन बारह घंटों के दौरान तेंदुआ भी शांत रहा। वन विभाग ने तेंदुए पर ध्यान केंद्रित किया और उसे ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट से पकड़ लिया।अब सवाल यह है कि भूखे तेंदुए ने कुत्ते पर हमला क्यों नहीं किया, जबकि ऐसा करना आसानी से संभव था?
वन्यजीव शोधकर्ताओं ने इस प्रश्न का उत्तर दिया है: उनके अनुसार, जंगली जानवर अपनी स्वतंत्रता के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।जैसे ही उन्हें यह एहसास होता है कि उनकी आजादी छीन ली गई है, उन्हें गहरा दर्द महसूस होने लगता है, यहां तक कि वे अपनी भूख भी भूल जाते हैं। खाने की उनकी स्वाभाविक प्रेरणा फीकी पड़ने लगती है। आज़ादी और खुशी एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अपनी इच्छानुसार सोचने, काम करने और जीने की आज़ादी





