गीता और नाट्यशास्त्र को मिला वैश्विक सम्मान, यूनेस्को के रजिस्टर में हुई ऐतिहासिक दर्ज

नई दिल्ली। भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि का नाट्यशास्त्र अब यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड’ रजिस्टर में शामिल हो गए हैं। यह रजिस्टर दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजी विरासतों को सुरक्षित रखने और आम लोगों की पहुंच में लाने के उद्देश्य से बनाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की और इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि “गीता और नाट्यशास्त्र का यूनेस्को के रजिस्टर में शामिल होना हमारी शाश्वत बुद्धिमत्ता और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। ये रचनाएं सदियों से मानव चेतना और सभ्यता को दिशा देती रही हैं।”

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी। उन्होंने लिखा, “यह भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए ऐतिहासिक पल है। गीता और नाट्यशास्त्र सिर्फ साहित्यिक रचनाएं नहीं, बल्कि भारत की सोच, भावनाओं और अभिव्यक्ति के दर्शन हैं।”

अब भारत के कुल 14 दस्तावेज यूनेस्को के इस महत्वपूर्ण रजिस्टर में शामिल हो चुके हैं।

क्या है ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’?

यूनेस्को का यह कार्यक्रम साल 1992 में शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य है दुनिया की अहम दस्तावेजी विरासतों को सुरक्षित रखना और लोगों को उनके बारे में जानकारी देना। इसमें सैकड़ों साल पुराने ग्रंथ, पांडुलिपियां, ऐतिहासिक अभिलेख शामिल किए जाते हैं।

इस सम्मान के साथ भारत ने एक बार फिर दुनिया को अपनी गहरी सांस्कृतिक जड़ों और बौद्धिक विरासत का अहसास कराया है।

 

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