भारत के हथियारों से बदल सकता है काकेशस का समीकरण

आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच नागोर्नो-काराबाख को लेकर लंबे समय से विवाद है। हाल ही में आर्मेनिया ने ईरान के साथ सैन्य अभ्यास किया, जबकि अजरबैजान तुर्की और इज़राइल से नज़दीकी बढ़ा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कभी भी युद्ध छिड़ सकता है, और इस बार भारत का नाम सीधे तौर पर चर्चा में है।
भारत बना आर्मेनिया का बड़ा हथियार सहयोगी
2020 के बाद आर्मेनिया ने भारत की तरफ रुख किया। रूस और अमेरिका से निराश होकर आर्मेनिया ने भारत से हथियार खरीदने शुरू किए। अब भारत से मिले कई आधुनिक हथियार उसके पास हैं, जिनमें आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, पिनाका रॉकेट लॉन्चर, होवित्जर तोपें और एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं। इन हथियारों की मदद से आर्मेनिया को अजरबैजान के खिलाफ सैन्य बढ़त मिलने की उम्मीद है।
भारत को क्या मिलेगा इस साझेदारी से?
भारत को काकेशस क्षेत्र में एक रणनीतिक स्थान मिल रहा है। यह ईरान, रूस और यूरोप के बीच का इलाका है, जहां भारत की मौजूदगी काफी अहम हो सकती है। इसके अलावा, यह भारत के “आत्मनिर्भर भारत” और रक्षा निर्यात बढ़ाने के लक्ष्य में भी मदद कर रहा है। पाकिस्तान के करीबी अजरबैजान को संतुलित करने के लिए भी भारत का यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
अगर युद्ध हुआ तो भारत के हथियारों की होगी अग्नि परीक्षा
अगर आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध छिड़ता है, तो भारत के भेजे हथियारों की असली परीक्षा होगी। यह टकराव केवल दो देशों का नहीं रहेगा, बल्कि इसमें ईरान, तुर्की, इज़राइल, रूस और पश्चिमी देशों की भूमिका भी जुड़ सकती है। ऐसे में भारत का नाम भले ही युद्ध में सीधे न हो, लेकिन उसका प्रभाव और हथियारों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला नहीं, बल्कि एक बड़ा रक्षा निर्यातक बन रहा है। आर्मेनिया के साथ हुए सौदे भारत की इस नई भूमिका को और मजबूत कर रहे हैं, जिससे उसका वैश्विक प्रभाव भी बढ़ रहा है।





