यूबीजीएल से लैस होंगे जवान – नक्सलियों का होगा सफाया

छत्तीसगढ़ के नक्सल मोर्चे की अब तस्वीर बदलने वाली है। राज्य पुलिस अब अपने जवानों को दे रही है वो ताकत, जो नक्सलियों के मन में खौफ भर देगी।
नक्सलियों का सफाया करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों को जल्द ही अत्याधुनिक यूबीजीएल ग्रेनेड लॉन्चर हथियारों से लैस किया जाएगा। इसके लिए 40 एमएम के 410 अत्याधुनिक यूबीजीएल ग्रेनेड लॉन्चर और 6100 सेल की खरीदी की जा रही है,और जल्द ही ये हथियार हर उस यूनिट को सौंपे जाएंगे जो नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन चला रही है। राज्य पुलिस के अधिकारी इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं। खरीदी के बाद इसे नक्सल मोर्चे पर तैनात प्रत्येक यूनिट को लॉन्चर दिया जाएगा।
क्या है यूबीजीएल?
यूबीजीएल यानी अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर – एक ऐसा हथियार जो हल्का है, लेकिन बेहद घातक होता है । और इसे एक व्यक्ति अकेले भी चला सकता है और ये कम दूरी के लक्ष्यों को बड़ी सटीकता से कवर करता है।
इसका वजन महज डेढ़ से तीन किलो के बीच होता है, जिससे जवान इसे जंगलों में मूवमेंट के दौरान आराम से लेकर चल सकते हैं।
क्यों है ये हथियार जरूरी?
छत्तीसगढ़ के नक्सल क्षेत्रों के जंगलों में जहां हर पेड़ के पीछे खतरा छुपा होता है, वहां पर जवानों को ऐसी तकनीक की ज़रूरत है जोतेज़ हो, सटीक हो और हल्की हो।यूबीजीएल से 40 से 50 फीट तक के इलाके को एक ही फायर में कवर किया जा सकता है।यानि जब नक्सली बड़ी संख्या में घात लगाते हैं, तो ये हथियार उन्हें तितर-बितर कर सकता है।
कैसे किया जाएगा इसका इस्तेमाल?
ऑपरेशन के दौरान, एक टीम में दो जवान होने और पर एक लांचर को सेट करने और दूसरे जवान द्वारा फायर करने से ज्यादा असर होगा
इसकी मारक क्षमता 1.5 से लेकर 2 किलोमीटर तक है, और ये लगातार 30 राउंड तक फायर कर सकता है। साथ ही इस ग्रेनेड का वजन 180 ग्राम से लेकर 1 किलो तक होता है।
जवानों के पास पहले से कौन-कौन से यूबीजीएल हैं?
नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों के पास पहले से 41, 51 और 81 एमएम के यूबीजीएल हैं। इनमें से सबसे घातक और भारी 81 एमएम मोर्टार है, जो 5 किलोमीटर तक के इलाके को कवर करता है।
हर मौसम में काम करने वाला हथियार
इस ग्रेनेड लॉन्चर को खासतौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह -20 डिग्री से लेकर +55 डिग्री तापमान में भी काम करता है। इसका आकार है 4 गुना 4.6 सेंटीमीटर व्यास और 25 सेंटीमीटर लंबा है जो जंगलों में ऑपरेशन के लिए परफेक्ट है।
क्या कह रही है सरकार?
इस हथियार की खरीदी के लिए डीआईजी योजना एवं प्रबंध मनीष शर्मा की अगुवाई में टेंडर जारी किया जा चुका है।
यानी बहुत जल्द ये हथियार STF और DRG की हर यूनिट को सौंपे जाएंगे।
क्या असर दिख रहा है ज़मीनी स्तर पर?
इस लगातार बढ़ती ताकत का असर अब ज़मीन पर दिखने लगा है। हाल ही में दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे सबसे संवेदनशील जिलों में 8 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और 2 को गिरफ्तार किया गया है।
गृह मंत्री अमित शाह का बयान
हालही में गृह मंत्री अमित शाह ने बताया था कि साल 2025 में 521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 2024 में यह संख्या 881 थी। उन्होंने कहा था कि सरकार मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमित शाह ने बीते शनिवार को कहा था कि नक्सली छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आदिवासियों के विकास को रोक नहीं सकते। इस दौरान शाह ने नक्सलियों से हथियार छोड़ने की भी अपील की। शाह ने कहा था कि हथियार डालकर मेनस्ट्रीम में आइए। आप हमारे अपने हैं। कोई नक्सली मारा जाता है तो किसी को आनंद नहीं होता





