गरियाबंद जिले में नक्सल प्रभाव घटा, युवा अब वर्दी पहनने की ओर बढ़े

गरियाबंद, 14 अप्रैल 2025:गरियाबंद जिले में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब बदलाव की झलक दिखने लगी है। पिछले कुछ महीनों में जिले के 100 से अधिक युवक-युवतियों ने यूनिफॉर्म सर्विस के लिए आवेदन किया, जिनमें से 32 का चयन हुआ है। विशेष बात यह है कि इनमें से 10 से ज्यादा चयनित युवा मैनपुर जैसे घोर नक्सल प्रभावित इलाके से हैं।

गरियाबंद जिले में पिछले आठ महीनों में यूनिफॉर्म सर्विस के लिए 32 युवक-युवतियों का चयन हुआ है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इनमें से आधे मैनपुर क्षेत्र से आते हैं, जो नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता है। एसपी निखिल राखेचा के अनुसार, चयनित युवाओं में सूबेदार, उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, अग्निवीर और नगर सैनिक शामिल हैं, और सभी ट्रेनिंग ले रहे हैं।

जाड़ापदर गांव की लिना नागेश, जिनके परिवार ने नक्सल गतिविधियों के बीच साहस दिखाया, अब सब इंस्पेक्टर बन चुकी हैं। लिना के द्वारा वर्दी पहनने की प्रेरणा से अब गांव में 20 से ज्यादा युवा पुलिस और सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं। इसी तरह, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युवा अब डर को मात देकर वर्दी पहनने के सपने देख रहे हैं।

सीआरपीएफ के सेकेंड इन कमांड रंजन कुमार बहाली ने बताया कि यह बदलाव अचानक से नहीं आया है, बल्कि पिछले दस वर्षों से पुलिस और सुरक्षा बलों ने लगातार प्रयास किए हैं। सीआरपीएफ के प्रयासों से अब ग्रामीण निडर हो चुके हैं और पुलिस सेना में शामिल हो रहे हैं।

2015 के बाद गरियाबंद जिला नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों और मुठभेड़ों के बाद नक्सलियों की पकड़ कमजोर पड़ी है। जनवरी में मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए, जिससे संगठन की ताकत घट गई और अब नक्सली भयभीत हो गए हैं।

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