छत्तीसगढ़ की ऐसी पहाड़ी, जहां छिपा है सोने का भंडार

चिरमिरी। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के वनांचल क्षेत्र में स्थित घघरा गांव अपनी दैविक और रहस्यमयी कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र कई प्राचीन मंदिरों, गुप्त सुरंगों और रहस्यमय पत्थरों से भरा हुआ है… लेकिन यहां की सबसे बड़ी रहस्यमयी जगह है “जतवा डोंगरी”—एक ऐसी पहाड़ी जिसके बारे में स्थानीय लोग कहते हैं कि यहां सोने का खजाना छुपा है.. इसके अलावा गरुड़ भगवान की मूर्ति है, और एक सुरंग भी मौजूद है… जिसमें पृथ्वी के सभी लोगों के लिए, तीन दिन का भोजन भरा हुआ है… जी हां… सुनकर ये थोड़ा अजीब, हैरतअंगेज़ हैं.. लेकिन ये मेरा नहीं यहां के लोगों का मानना है…
दरअसल घघरा गांव के स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि “सियान लोग यानि कि बुजुर्ग लोग बताते हैं कि जतवा डोंगरी के पास पीपल के पेड़ के नीचे एक बड़ा सा पत्थर रखा गया है… इसे कई साल पहले कुछ लोग दिल्ली ले गए थे, लेकिन बाद में यह वापस यहाँ लाकर रख दिया गया…”इतना ही नहीं, यहाँ एक सुराख (छेद) भी है, जिसके बारे में मान्यता है कि भगवान इसी रास्ते से गए थे, और उनके जाने के बाद यह रास्ता बंद हो गया..और इस छेद को अब एक बड़े पत्थर से ढंक दिया गया है..
वहीं वेदों के जानकार रमाशंकर सिंह का कहना है कि “जतवा पहाड़ी में जहाँ भी खुदाई की जाती है, वहाँ कोई न कोई देवी-देवता की मूर्ति या किसी चक्र का निशान वाला पत्थर मिलता है.. ये सभी पत्थर गढ़े हुए हैं, जिससे साफ पता चलता है कि यहाँ किसी प्राचीन सभ्यता का अस्तित्व रहा है।”
इसके अलावा यहाँ कई ऐसी मूर्तियाँ और पत्थर मिले हैं, जो हजारों साल पुराने माने जाते हैं… कहा जाता है कि यहाँ एक सुरंग है, जो 1 किलोमीटर तक फैली हुई है..और इस सुरंग के बारे में मान्यता है कि इसमें पूरी दुनिया के सभी लोगों के लिए तीन दिन का भोजन संग्रहित किया गया था…वहीं सुरंग के प्रवेश द्वार पर एक विशाल पत्थर का दरवाजा लगा हुआ है, जिसके सामने एक प्राचीन मूर्ति स्थापित है…
वहीं ग्रामीण बताते हैं कि “इस पहाड़ी पर जो पत्थर हैं, वे किसी आम पत्थर की तरह नहीं हैं… हर पत्थर की एक अलग आकृति और डिजाइन है… इनमें से कई पत्थर देवताओं की मूर्तियों के रूप में हैं।”
इसके अलावा ग्रामीणों का ये भी कहना है कि अगर सरकार और पुरातत्व विभाग यहाँ खुदाई कराए, तो यह स्थान एक ऐतिहासिक खोज साबित हो सकता है… वे चाहते हैं कि यहाँ एक भव्य मंदिर का निर्माण हो, ताकि यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से संरक्षित रह सके…
इतनी सारी रहस्यमयी घटनाओं और मूर्तियों के मिलने के बाद सवाल उठता है—क्या जतवा डोंगरी सच में कोई प्राचीन नगर था?…क्या यहाँ कभी कोई महान सभ्यता बसती थी.. जो अब विलुप्त हो चुकी है?… वहीं यहां कुछ रहस्य भी हैं जो अब तक अनसुलझे हैं… जैसे-
- सोने के खजाने की कहानी कितनी सच्ची है?
- सुरंग के अंदर क्या वाकई कोई प्राचीन भंडार मौजूद है?
- यहाँ मिलने वाली सभी मूर्तियाँ हजारों साल पुरानी क्यों हैं?
अब ऐसे में जतवा डोंगरी पहाड़ी का रहस्य अभी भी अनसुलझा है.. क्या जतवा डोंगरी अपने रहस्यों को कभी खोलेगा? अगर सही तरीके से पुरातत्व अध्ययन किया जाए, तो यह स्थान भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हो सकता है… यह पहाड़ी छत्तीसगढ़ की ‘अघोषित अजंता-एलोरा’ बन सकती है, जहाँ हर पत्थर के नीचे कोई अनोखी दास्तान छुपी हुई है।





