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देश की युवा सरोद वादक देबस्मिता भट्टाचार्य का शहर आगमन

देश की जानी-मानी और सुप्रसिद्ध सरोद वादक देबस्मिता भट्टाचार्य आगामी 24 मार्च से 29 मार्च तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न नगरों में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। उनके इस सांगीतिक यात्रा का पहला कार्यक्रम 24 मार्च को सीएमडी कॉलेज और प्रयास स्कूल, कोनी में संपन्न हुआ।

युवा उभरती कलाकार देबस्मिता भट्टाचार्य

देबस्मिता भट्टाचार्य को भारत की सबसे रोमांचक युवा सरोद वादकों में गिना जाता है। वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को उसकी परंपराओं के साथ आधुनिकता का स्पर्श देते हुए 21वीं सदी में प्रस्तुत कर रही हैं। उनके संगीत में गहराई और परिपक्वता के साथ-साथ युवा ऊर्जा का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।

उनका संगीत प्रशिक्षण उनके पिता पंडित देबाशीष भट्टाचार्य से प्रारंभ हुआ, जो दिवंगत उस्ताद पद्मभूषण पंडित बुद्धदेव दासगुप्ता के वरिष्ठ शिष्य थे। प्रारंभ से ही उन्होंने पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले वाद्य सरोद में अपनी अलग पहचान बनाई। किशोरावस्था में वे अपने पिता के गुरु की प्रत्यक्ष शिष्या बनीं और पूरी तरह संगीत को समर्पित कर दिया।

देबस्मिता ने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातकोत्तर किया। साथ ही, उन्होंने आईटीसी संगीत अनुसंधान अकादमी में सात वर्षों तक स्कॉलर के रूप में अध्ययन किया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकती प्रतिभा

उनके संगीत कार्यक्रमों ने न केवल कोलकाता बल्कि पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धूम मचाई। 2017 में दरबार फेस्टिवल के लिए वे यूके गईं, जहाँ उनका प्रदर्शन सराहा गया। हाल ही में उन्होंने चीन, अफ्रीका और स्कैंडिनेविया के संगीतकारों के साथ भी काम किया है।

सरोद एक 23 तारों वाला वाद्य यंत्र है, जिसकी ध्वनि गहरी और आत्मीय होती है। इसे बजाने के लिए नारियल के खोल से बने प्लेक्ट्रम का उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि सरोद का उद्गम अफगान रबाब से हुआ है, जो 18वीं सदी में भारत आया था।

स्पीकमैके द्वारा विशेष आयोजन

स्पीकमैके (SPIC MACAY) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की रूपरेखा इसके संस्थापक डॉ. किरण सेठ द्वारा तैयार की गई है। इस पूरे आयोजन में एवीएम न्यू सैनिक स्कूल के चेयरमैन डॉ. अजय श्रीवास्तव का विशेष योगदान है। डॉ. किरण सेठ भारतीय संस्कृति, लोक कला और संगीत को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

इस सांगीतिक यात्रा के दौरान देबस्मिता भट्टाचार्य के आगामी कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

25 मार्च: एलोन्स स्कूल, बेमेतरा और RWS, रायपुर

26 मार्च: आधारशिला विद्या मंदिर, सैनिक स्कूल, बिलासपुर

27 मार्च: अडानी वर्ल्ड स्कूल, अंबिकापुर

28 मार्च: अगोर विद्यापीठ, अकलतरा

29 मार्च: ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, चांपा और एशियन वर्ल्ड स्कूल, बाराद्वार

इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन श्री संजय दुबे का भी सहयोग रहा। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति और संगीत से जोड़ना है, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझ सकें और आगे बढ़ा सकें।

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