बस्तर में जवानों का बड़ा ऑपरेशन, जानिए क्या कुछ रहा खास

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में 20 मार्च, गुरुवार को, नक्सल संगठनों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। बस्तर के दो अलग- अलग इलाकों में मुठभेड़ हुई। सुबह से ही जवानों ने नक्सलियों के कोर इलाकों में घुसकर उन्हें घेर लिया। करीब 10 घंटे तक लगातार दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। जिसमें 30 नक्सली मारे गए। इसमें से बीजापुर में 26, तो कांकेर में 4 नक्सली मारे गए। वहीं इस मुठभेड़ में नक्सलियों से लोहा लेते हुए DRG का एक जांबाज जवान शहीद हो गया।

 

पहली मुठभेड़ बीजापुर-दंतेवाड़ा बार्डर पर हुई। बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के अंडरी और गमपुर के बीच जंगल में 600 जवानों की पार्टी नक्सलियों को घेरने रवाना हुई थी। जवानो के रात में घेरेबंदी की बड़ी वजह मौजूदा मौसम रही। पतझड़ के कारण जंगलों में पेड़ों के पत्ते गिर रहे हैं, जिससे वहां अंधेरा काफी कम होता है। इसी का फायदा उठाते हुए जवानों ने रातभर पैदल चलकर पूरे इलाके को घेर लिया। वही नक्सलियों को इसकी भनक तक नहीं लगी और जवानों ने 26 नक्सलियों को ढेर कर दिया।

 

मुठभेड़ के दौरान DRG का एक जवान शहीद हो गया। जवानों ने मौके से 26 नक्सलियों के शब् बरामद किए है। सभी नक्सलियों के शव को दंतेवाड़ा लाया गया है। वही जवानों ने मौके से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किया है। उधर नारायणपुर और कांकेर की सीमा पर मुठभेड़ में  4 नक्सलियों को ढेर हुए हैं। इस दौरान शीर्ष नक्सली लीडर पापा राव और लिंगू भी जंगल के अंदर नक्सली ठिकानों पर मौजूद थे। जैसे ही जवानों ने नक्सलियों को घेरकर उन पर हमला किया और नक्सली ढेर होने लगे, तो दोनों शीर्ष नक्सली लीडर भाग निकले। फिलहाल जवानों ने मारे गए चारों नक्सलियों के शव को कांकेर ला लिया है।

 

इसमें खास बात ये रही कि जवानों ने नक्सलियों के TCOC महीने में ही ये सफलता हासिल की है। जो एक बड़ी सफलता है और ये साल 2025 में, नक्सलियों के TCOC महीने में, फोर्स का पहला बड़ा ऑपरेशन था। दरअसल बस्तर में 1 मार्च से जून के पहले सप्ताह तक नक्सली TCOC यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन चलाते हैं,  जिसमें नए लड़ाकों को जोड़कर, नक्सली बड़ी घटना को अंजाम देते हैं। इसमें एक और खास बात ये रही कि ये सफलता दिनेश मोड़ियाम की निशानदेही में मिली, जो पूर्व में नक्सली था और हाल ही में उसने सरेंडर किया था। बता दें कि दिनेश मोड़ियाम DVCM कैडर का सदस्य था और गंगालूर एरिया कमेटी में सक्रिय था। साथ ही कई नक्सल घटनाओं का मास्टरमाइंड भी था।

 

बीजापुर में मुठभेड़ सुबह शुरू हुई जो 10 घंटे चली। मारे गए नक्सली के शवों के साथ AK-47, इंसास, SLR जैसे हथियार और गोला बारूद बरामद हुए हैं। हमला एक हफ्ते पहले सरेंडर किए नक्सली दिनेश मोड़ियाम की निशानदेही पर किया गया था। दिनेश मोड़ियाम DVCM कैडर का था और गंगालूर एरिया कमेटी में सक्रिय था। बीजापुर जिले में हुई नक्सल घटनाओं में अधिकांश का यही मास्टरमाइंड है। 100 से ज्यादा जवानों की हत्या में शामिल रहा। पुलिस की लिस्ट में मोस्ट वांटेड नक्सली था। सरकार ने इस पर 8 लाख रुपए का इनाम रखा था।

 

खास बात रही कि नक्सलियों के TCOC यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन महीने में ही जवानों ने कोर इलाके में घुसकर एनकाउंटर किया है। साल 2025 में नक्सलियों के TCOC महीने में फोर्स का पहला बड़ा ऑपरेशन था और इसमें कामयाबी मिली। बस्तर में 1 मार्च से जून के पहले सप्ताह तक नक्सली TCOC यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन चलाते हैं। नए लड़ाकों को जोड़ना और एंबुश में जवानों को फंसा कर बड़ी घटना करते हैं। साल 2024 से पहले तक नक्सली TCOC महीने में पुलिस फोर्स पर हावी थे। लेकिन, साल 2024 में फोर्स आक्रामक हुई। वहीं 2025 में भी फोर्स TCOC के पहले महीने में नक्सलियों के ठिकाने में घुसी, 30 माओवादियों को मारकर उनके शव लेकर आई।

 

नक्सलियों से मोर्चा लेने के दौरान मुठभेड़ में DRG का जवान राजू ओयामी शहीद हो गए। मारे गए नक्सलियों के साथ शहीद जवान का पार्थिव शरीर भी दंतेवाड़ा ला लिया गया है। बस्तर आईजी की माने तो साल 2024 में नक्सल विरोधी अभियान में मिली बढ़त को बरकरार रखते हुए इस साल भी नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। पिछले 80 दिनों में अलग-अलग मुठभेड़ों में 93 नक्सलियों को ढेर किया जा चूका है। 19 मार्च को पुलिस अधिकारीयों को गंगालूर थाना क्षेत्र के अंडरी और गमपुर के बीच जंगल में नक्सलियों के बड़े लीडर्स की मौजूदगी के इनपुट मिले थे।

 

इनपुट के मुताबिक नक्सली आने वाले दिनों में बस्तर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की रणनीति तैयार करने वाले थे। इस पर पुलिस अधिकारियों ने 19 मार्च की रात DRG, STF और CRPF की संयुक्त टीम को रवाना किया, जिसके बाद जवानों को बड़ी सफलता मिली है। लगातार मारे जाने और उनके समर्पण करने से कहीं ना कहीं नक्सली पूरी तरह से कमजोर हो गए हैं। ऐसा लगता है जैसे जवानों के डर और शासन द्वारा चलाई जा रही योजना से ज्यादातर नक्सली समर्पण कर मुख्य धारा में वापस लौट रहे हैं। वही समर्पित बड़े नक्सलियों की निशानदेही जवानों के लिए बड़ी सफलता का कारण बन रही है।

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