रिटायर्ड अफसर से करोड़ों की ठगी, फर्जी दस्तावेजों से गायब जमीन बेची

बिलासपुर में एक रिटायर्ड सहायक आयुक्त को करोड़ों रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया है, जब ठगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन्हें ‘गायब’ जमीन बेच दी। ठगी का शिकार बने अमरचंद बर्मन को जब सच्चाई का पता चला, तो उनके होश उड़ गए। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, लेकिन अब तक केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी हो पाई है।
अमरचंद बर्मन ने अपने बेटे के लिए रिंग रोड टू में जमीन खरीदने का सौदा किया और 72 लाख रुपये चुका दिए, लेकिन जब रजिस्ट्री नहीं हुई, तो ठगों ने उन्हें दूसरी जमीन देने का वादा किया। इस बार विकास मांझी और राजेश पांडे ने उन्हें खसरा नंबर 448/11 और 448/37 की जमीन बेच दी और 1 करोड़ 75 लाख रुपये की रजिस्ट्री भी करवा दी। लेकिन जब बर्मन साहब ने जमीन बेचने का फैसला किया, तो उन्हें पता चला कि यह जमीन रिंग रोड टू में है ही नहीं! यानी, न जमीन थी, न सौदा असली था, केवल दस्तावेजों का खेल था।
एस आर साहू, टी आई सिविल लाइन ने मामले में जानकारी दी और बताया कि पुलिस ने विकास मांझी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन बाकी आरोपी अब भी फरार हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन लोगों ने फर्जी रजिस्ट्री करवाई, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
जब पुलिस आरोपी विकास मांझी के घर दस्तावेजों की जांच करने पहुंची, तो उसकी पत्नी और बेटी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और महिला आरक्षक से हुज्जतबाजी तक कर दी। इस पर मां-बेटी के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया, लेकिन असली ठग अब भी आज़ाद हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस इस ठगी के जाल को कब तक सुलझा पाती है, या फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।





