रेलवे ट्रैक पार करना जान जोखिम में डालने के साथ-साथ दंडनीय अपराध भी, कई पर बेवजह बन रहे मामले

बिलासपुर
रेलवे ट्रैक पार करना न केवल आपकी जान को जोखिम में डालता है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है। भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, ट्रैक पार करने पर छह माह तक की जेल, ₹1000 तक का जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है। हालांकि, यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा निर्देश है, जिसे रेलवे लगातार पालन कर रहा है। लेकिन यह भी सवाल उठता है कि जब बेगुनाह लोगों पर जबरदस्ती प्रकरण बनाए जाते हैं, तब यह सभी नियम और निर्देश बेमानी क्यों लगने लगते हैं।
मौजूदा समय में रेलवे सुरक्षा बल द्वारा प्रस्तुत आंकड़े यह दर्शाते हैं कि 1283 अनाधिकृत प्रवेश, न्यूसेन्स, और अवैध वेंडर्स के खिलाफ 3063 व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में इस दौरान 28,419 व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई। हालांकि, जब इन आंकड़ों की वास्तविकता पर गौर किया जाता है, तो कई मामलों में यह स्पष्ट होता है कि निर्दोष व्यक्तियों पर केवल लक्ष्य पूरा करने के लिए आरोप लगाए गए हैं, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और ही होती है।
इस प्रकार के प्रकरणों में जब निर्दोष लोगों पर कार्रवाई की जाती है, तो यह निश्चित रूप से रेलवे प्रशासन की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। अगर रेल प्रशासन वास्तव में नियमों का पालन करना चाहता है, तो उसे इन दोहरे मापदंड से दूर रहना होगा। यदि इसी तरह से सिर्फ लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रकरण बनाते रहेंगे, तो लोगों का आक्रोश रेलवे प्रशासन के प्रति बढ़ेगा, जो आगे चलकर सामाजिक विश्वास को कमजोर कर सकता है।





