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FIR: कांग्रेस प्रवक्ता के बेटे का नाम FIR से गायब, क्या राजनीतिक दबाव में आई पुलिस?

बिलासपुर, FIR: – अपराधियों के हौसले अब इस कदर बढ़ गए हैं कि थाने में रिपोर्ट लिखवाना भी मुश्किल हो गया है। हाल ही में बिलासपुर के देवरीखुर्द स्थित कैफे अरेना क्लब में हुई गुंडागर्दी ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है, जब कांग्रेस प्रवक्ता अभय नारायण राय के बेटे अमितेश राय का नाम एफआईआर से गायब कर दिया गया।

यह पूरी घटना 27 फरवरी की रात की है, जब सुगम निषाद नाम का युवक क्लब में गेम खेल रहा था। उसी दौरान कांग्रेस प्रवक्ता के बेटे अमितेश राय, अरुण राय, राजा बंगाली और कुख्यात बदमाश अविनाश सोनकर उर्फ दददू शराब के नशे में क्लब पहुंचे। आरोप है कि इन बदमाशों ने पहले युवक से गाली-गलौच की और फिर मारपीट की। पीड़ित युवक ने यह भी आरोप लगाया है कि अविनाश सोनकर ने उसे गोली मारने की धमकी दी।

पीड़ित ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन जब एफआईआर की जांच की गई, तो उसमें अमितेश राय का नाम गायब था। यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते अमितेश राय का नाम एफआईआर से हटा दिया? क्या यह कदम अपराधियों को बचाने की साजिश है?

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क्या है FIR में गड़बड़ी?
एफआईआर में अमितेश राय का नाम न लिखकर क्या पुलिस दबाव में काम कर रही है? क्या यह मामला सिर्फ पुलिस की गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है? अमितेश राय का नाम एफआईआर में न होने के बावजूद, वह घटना में वीडियो में स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस प्रवक्ता का बेटा होने के कारण पुलिस ने जानबूझकर एफआईआर में उनका नाम नहीं लिखा?

क्या बिलासपुर पुलिस नेताओं के इशारे पर काम कर रही है?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या पुलिस बड़े नेताओं और उनके परिवारों के दबाव में आकर कानून की धाराओं को बदल रही है? क्या बिलासपुर पुलिस अब नेताओं के इशारे पर कानून की किताब लिखने लगी है?

अब क्या होगा?
अब यह देखना होगा कि पुलिस इस मामले में अपनी गलती स्वीकार कर अमितेश राय का नाम एफआईआर में जोड़ती है या फिर इस पूरी गुंडागर्दी को राजनीतिक संरक्षण देकर दबा दिया जाएगा। क्या पुलिस इस मामले में सही कदम उठाएगी या फिर राजनीतिक प्रभाव के चलते मामले को दबा दिया जाएगा?

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