बजट सत्र : पूर्व मंत्री ने दीपक बैज के हक में कही बात, मीटिंग में छा गया सन्नाटा

बजट सत्र : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान, निकाय चुनाव में मिली हार को लेकर कांग्रेस विधायक दल की बैठक में एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस बैठक में पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने हार की जिम्मेदारी को लेकर अपने विचार साझा किए। जिसके बाद थोड़ी देर के लिए मीटिंग में शान्ति छा गयी
सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि निकाय चुनावों में मिली हार की जिम्मेदारी केवल प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज पर नहीं डाली जा सकती। उन्होंने इसे सामूहिक पराजय करार दिया और कहा, हर नेता ने अपने-अपने क्षेत्र में टिकटों का वितरण किया था। यदि हार हुई है, तो यह सबकी जिम्मेदारी है, न कि सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष की। अकबर ने बताया कि टिकट वितरण की प्रक्रिया में सभी नेताओं की भागीदारी थी, और उनके क्षेत्र के प्रत्याशी की सूची भी प्रदेश अध्यक्ष के पास गई थी, जिसे बिना बदलाव के मंजूरी दी गई।
बैठक में हुई सहमति
अकबर के बयान के बाद, बैठक में कुछ देर तक चुप्पी रही। फिर कुछ विधायकों ने उनकी बात का समर्थन किया और कहा कि हार की जिम्मेदारी पूरी पार्टी की है, न कि सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष की।
कांग्रेस के आगामी मुद्दे – बजट और अन्य योजनाएं
कांग्रेस विधानसभा सत्र में सरकार की नीतियों और बजट को लेकर सवाल उठाने वाली है। कांग्रेस पार्टी निम्नलिखित मुद्दों को उठाने का विचार कर रही है:
1.प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना: 18 लाख हितग्राहियों को पूरी राशि नहीं मिली, केवल पहली किस्त जारी हुई। इसके चलते गरीब लोग आवास निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।
2. महतारी वंदन योजना: मृतक हितग्राहियों को राशि मिल रही है, लेकिन 30 हजार पात्र महिलाएं अब तक वंचित हैं। साथ ही, अपात्र लोगों को भी लाभ मिल रहा है।
3. तेन्दूपत्ता संग्राहक बोनस 4500/- प्रति मानक बोरा बोनस अब तक नहीं मिला। किसानों को धान उपार्जन की राशि किश्तों में दी जा रही है, जबकि पहले यह एकमुश्त देने का वादा किया गया था।
4. शिक्षक भर्ती 35 हजार शिक्षकों की भर्ती बजट में स्वीकृत हुई थी, लेकिन एक साल बाद भी विज्ञापन जारी नहीं हुआ।
5 कानून व्यवस्था गैंगवार और दिनदहाड़े फायरिंग आम हो गई है। मादक पदार्थों और अवैध शराब की तस्करी तेजी से बढ़ रही है।
6.शिक्षण संस्थानों में अनाचार: प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में छात्राओं के साथ दुष्कर्म के मामले बढ़ रहे हैं।
7.आदिवासी कन्या आश्रमों में शोषण- कई छात्राएं गर्भवती हो रही हैं, जिससे महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
8. जल-जंगल-जमीन का निजीकरण –सरकार उद्योग-धंधों को निजी क्षेत्रों को बेचने की योजनाएं बना रही है, जिससे आदिवासियों और स्थानीय लोगों के अधिकार खतरे में हैं।
बजट और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल
कांग्रेस यह सवाल उठा सकती है कि क्या भाजपा सरकार के बजट में जनता के लिए ठोस योजनाएं हैं, या यह केवल घोषणाओं तक सीमित रहेगा। साथ ही, कांग्रेस सरकार के वित्तीय प्रबंधन और खर्चों की प्राथमिकता पर भी सवाल उठा सकती है।
केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग पर सवाल
कांग्रेस यह मुद्दा भी उठा सकती है कि केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता में कटौती क्यों हो रही है। केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्य को कितना फंड मिला और वह सही तरीके से खर्च हुआ या नहीं, इस पर भी बहस हो सकती है।





