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चीन की कंपनी DeepSeek ने AI में किया कम बजट में बड़ा कमाल

बीजिंग। चीन की स्टार्ट-अप कंपनी DeepSeek ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक बड़ा उलटफेर किया है। इसने कम बजट में एक टॉप-टियर AI मॉडल तैयार किया है, जबकि इसके अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी बड़े-बड़े खर्च कर रहे हैं। जहां बड़े AI कंपनियाँ करोड़ों डॉलर खर्च कर रही हैं, वहीं DeepSeek ने कम से कम संसाधनों के साथ अधिक हासिल किया है।

DeepSeek की सफलता का रहस्य स्मार्ट इंजीनियरिंग, एक खास प्रकार के न्यूरल नेटवर्क डिजाइन और गणितीय दक्षता में छिपा है। अधिकांश AI कंपनियाँ अपने डेटा सेंटर में हजारों GPUs (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) का इस्तेमाल करती हैं। Meta के AI मॉडल को चलाने के लिए 16,000 खास चिप्स की जरूरत पड़ी थी, जिनकी कीमत लगभग $40,000 थी। वहीं, DeepSeek ने सिर्फ 2,000 चिप्स का उपयोग किया और इसका कुल खर्च सिर्फ 6 मिलियन डॉलर था, जो Meta के खर्च का लगभग दसवां हिस्सा है।

जनरलिस्ट नेटवर्क सभी नेटवर्क को जोड़ता है

‘Mixture of Experts’ तकनीक DeepSeek की सफलता की कुंजी “Mixture of Experts” नामक तकनीक में है। पारंपरिक AI मॉडल सभी ज्ञान को एक बड़े न्यूरल नेटवर्क में समाहित करने की कोशिश करते हैं, जो बहुत खर्चीला और ऊर्जा-खपत करने वाला होता है। DeepSeek ने इसके बजाय सिस्टम को छोटे-छोटे विशेषीकृत नेटवर्क में बांट दिया, जैसे कि कविता के लिए एक नेटवर्क, कोडिंग के लिए दूसरा, और जीवविज्ञान के लिए तीसरा। एक “जनरलिस्ट” नेटवर्क इन सभी को जोड़ने का काम करता है।

गणितीय दक्षता का इस्तेमाल DeepSeek ने AI मॉडल के लिए गणितीय दक्षता का भी फायदा उठाया। सामान्य AI मॉडल 16-बिट प्रिसीजन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि DeepSeek ने इसे 8-बिट तक घटा दिया, जिससे मेमोरी का उपयोग आधा हो गया और गणनाएँ तेज़ हो गईं। इस तरह के बदलाव से AI की कार्यक्षमता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा और जब जरूरी हुआ, तो DeepSeek ने परिणामों को 32-बिट में वापस बढ़ा दिया।

AI के बड़े नाम जैसे OpenAI और Google की DeepMind के पास संसाधन और बुद्धिमत्ता दोनों हैं, लेकिन फिर भी वे यह तरीका क्यों नहीं अपना पाए? इसका कारण है जोखिम। AI मॉडल बनाना महंगा है और नई तकनीकों के प्रयोग से सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। DeepSeek ने यह जोखिम उठाया और सफल हुआ।

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