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अमेरिका ने दी डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि, कहा- US और INDIA की एकजुटता के लिए हमेशा याद रखे जाएंगे

नई दिल्ली। अपने आर्थिक सुधारों के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने वाले पूर्व वित्त मंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। 26 सितंबर देर रात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh Death) का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बतौर प्रधानमंत्री रहते हुए डॉ.मनमोहन सिंह ने देश हित में कई बड़े फैसले लिए थे। उन्हीं फैसलों में से एक है भारत-अमेरिका (America) के बीच असैन्य परमाणु समझौता। इस समझौते के बाद भारत को परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (NSG) से छूट मिली थी। इसके अलावा देश को अपने नागरिक और सैन्य परमाणु कार्यक्रमों को अलग करने की अनुमति मिली थी। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर अमेरिका ने शोक जताया है। यूएसए ने भारत (INDIA) के लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।

अमेरिका ने कहा कि डॉ. सिंह अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी के सबसे महान समर्थकों में से एक थे। उन्होंने ही पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका ने जो कुछ हासिल किया है, उसकी नींव रखी। डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर परमाणु सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। यह समझौता न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि इसने दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। अमेरिकी प्रशासन ने अपने बयान में आगे कहा कि घरेलू स्तर पर, डॉ. सिंह को उनके आर्थिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने भारत की आर्थिक बढ़ोतरी को गति दी। हम डॉ. सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हैं और अमेरिका और भारत को एक साथ लाने के उनके समर्पण को हमेशा याद रखेंगे।

साल 2008 में अमेरिका के साथ हुए असैन्य परमाणु समझौते में मनमोहन सिंह का बहुत बड़ा योगदान था। इस समझौते ने अमेरिका के साथ भारत के समग्र संबंधों को बदल दिया था। इस समझौते के बाद भारत को परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (NSG) से छूट मिली थी। इसके अलावा देश को अपने नागरिक और सैन्य परमाणु कार्यक्रमों को अलग करने की अनुमति मिली। इस समझौते के बाद ही भारत को उन देशों से यूरेनियम आयात करने की अनुमति मिली, जिनके पास यह तकनीक है।

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