आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांग: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने उठाई नियमितीकरण की मांग,
30 हजार रुपये मानदेय देने की मांग

छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। (आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांग) कार्यकर्ताओं ने नियमितीकरण, मानदेय में बढ़ोतरी और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में सीमित मानदेय पर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं, विभागीय कामकाज के अलावा अन्य जिम्मेदारियां दिए जाने से भी काम का दबाव बढ़ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार से ठोस पहल करने की अपील की है।
पेंशन, ग्रेच्युटी और बीमा का लाभ देने की मांग, (आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांग)
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को सामने रखते हुए सरकार से जल्द निराकरण की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियमित किया जाए। नियमितीकरण होने तक श्रम कानूनों के तहत कार्यकर्ताओं को 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25 हजार 500 रुपये मासिक मानदेय दिया जाए।
इसके अलावा कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर और सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर सीधे पदोन्नति देने के साथ उम्र की सीमा समाप्त करने की मांग की गई है। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग है।
लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यानाकर्षण
वहीं, आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ताओं को पांच लाख और सहायिकाओं को तीन लाख रुपये देने तथा मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष एक हजार रुपये मानदेय बढ़ाने की मांग भी रखी गई है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे विभागीय जिम्मेदारियों के साथ कई अन्य काम भी करती हैं, जिससे कार्यभार बढ़ता है और नियमित कामकाज प्रभावित होता है। ऐसे में उन्होंने सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द उचित निर्णय लेने की अपील की है।





