बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ को पद्मश्री सम्मान, 35 साल की समाजसेवा को मिला राष्ट्रीय गौरव

दंतेवाड़ा की समाजसेविका डॉ. बुधरी ताती को समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में तीन दशक से अधिक समय तक शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली डॉ. ताती को यह सम्मान राष्ट्रपति के हाथों प्राप्त हुआ। पद्मश्री उनके जीवन का 23वां सम्मान है।
बस्तर के कई गांवों में लोग उन्हें प्यार से ‘बुआ’ और ‘बड़ी दीदी’ कहकर बुलाते हैं। सम्मान ग्रहण करते समय उन्होंने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा पहनकर अपनी संस्कृति और पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
15 साल की उम्र में चुना समाजसेवा का रास्ता
डॉ. बुधरी ताती ने किशोरावस्था में ही समाजसेवा को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया था। समाजसेवी लखमू बाबा से प्रेरित होकर उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया और बस्तर लौटकर जनसेवा का कार्य शुरू किया। उस दौर में आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं का सामाजिक कार्यों में सक्रिय होना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अशिक्षा, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया।
उन्होंने अपने जीवन के 35 वर्ष बस्तर के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के विकास के लिए समर्पित किए। इस दौरान वे 545 से अधिक गांवों तक पैदल पहुंचीं और लोगों को जागरूक करने का काम किया।
महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य को बनाया मिशन
डॉ. ताती ने 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने महिलाओं को स्वरोजगार, सिलाई-कढ़ाई और अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया।
इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वच्छता, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी व्यापक अभियान चलाए। नशामुक्ति को लेकर उनके प्रयासों का असर कई गांवों में देखने को मिला, जहां लोगों ने नशे की आदत छोड़कर नई शुरुआत की।
संघर्षों के बीच समाजसेवा का सफर जारी
डॉ. बुधरी ताती ने समाजसेवा के लिए विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन जनकल्याण को समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें सामाजिक विरोध और जानलेवा परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने मिशन से कभी समझौता नहीं किया।
हिरानार में उन्होंने एक वृद्धाश्रम की स्थापना की है, जहां बेसहारा बुजुर्गों को आश्रय और सम्मान मिल रहा है। इसके अलावा वे गरीब और अनाथ आदिवासी बच्चों की शिक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
डॉ. ताती का मानना है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सेवा, समर्पण और निरंतर प्रयास जरूरी हैं। पद्मश्री सम्मान उनके इसी संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है।





