नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल का कठोर कारावास

रायपुर की विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में आरोपी मनोज महिलांग को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला वर्ष 2025 में सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की जांच निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया था।
अदालत में आरोप साबित, सुनाई गई सजा
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य एकत्र कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया और 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
पीड़िता की पहचान गोपनीय, कानून का पालन
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पॉक्सो एक्ट के तहत निर्धारित सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। सिविल लाइन थाना पुलिस ने प्राथमिकता के आधार पर जांच पूरी कर न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
बाल अपराधों पर सख्त संदेश
पुलिस का कहना है कि अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर कड़ा संदेश देता है। नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपराध, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।





