आदिवासी ग्रामीणों का कलेक्ट्रेट घेराव, बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतरे

धमतरी जिले में वनांचल क्षेत्र के 45 गांवों के हजारों आदिवासी ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से मांग उठाने के बावजूद उनके गांवों तक विकास नहीं पहुंच पाया है।
पैदल मार्च कर पहुंचे कलेक्ट्रेट, पुलिस से हुई भिड़ंत जैसी स्थिति
ग्रामीण शांति घाट से पैदल मार्च करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर बैरिकेड लगाए और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे रहे और कलेक्ट्रेट तक पहुंचने में सफल रहे।
ग्रामीणों ने बताई विकास की कमी और कठिन जीवन की कहानी
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांवों में सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। महिलाओं ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बच्चों को भी खराब रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में विभिन्न प्रशासनिक और वन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, जिससे क्षेत्र पिछड़ा हुआ है।
प्रशासन ने दिया मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने अपनी मांगों का ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। प्रशासन की ओर से कुछ मांगों पर तत्काल कार्रवाई और अन्य मुद्दों पर जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित क्षेत्र संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसके कारण विकास कार्यों के लिए विशेष प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी अपने-अपने गांवों के लिए लौट गए।





