ड्रग्स नेटवर्क की जांच में ईडी की एंट्री, मनी ट्रेल और फंडिंग के स्रोत खंगाले जाएंगे

रायपुर के चर्चित ड्रग्स प्रकरण की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है और कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्तियों की पड़ताल की तैयारी कर रही है। इसके लिए एजेंसी ने पुलिस से चार्जशीट और जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियां मांगी हैं।
मनी ट्रेल और आर्थिक नेटवर्क पर फोकस
ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ड्रग्स कारोबार से अर्जित धनराशि किन माध्यमों से संचालित की गई और उसे कहां निवेश किया गया। एजेंसी की जांच का दायरा उन लोगों तक भी पहुंच सकता है, जिनकी भूमिका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नेटवर्क से जुड़ी रही है। ईडी की एंट्री के बाद मामले से जुड़े कई लोगों की चिंता बढ़ गई है।
पुलिस जांच में सामने आया था संगठित नेटवर्क
मामले का खुलासा वर्ष 2025 में हुआ था, जब पुलिस ने एमडीएमए के साथ कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसके बाद मुख्य आरोपी के रूप में नाव्या मलिक का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों के अनुसार ड्रग्स सप्लाई का संचालन मोबाइल फोन और डिजिटल माध्यमों के जरिए किया जाता था। पुलिस ने अपनी जांच में इसे एक संगठित नेटवर्क बताया था, जिसके संपर्क प्रभावशाली लोगों तक फैले हुए थे।
चार्जशीट में कई अहम खुलासे
पुलिस की चार्जशीट में दावा किया गया है कि नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की पहचान हुई थी और मामले में कई गिरफ्तारियां भी की गईं। जांच के दौरान जब्त मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में संपर्कों और लेन-देन से जुड़ी जानकारियां सामने आई थीं। चार्जशीट में एक रहस्यमयी नाम का भी उल्लेख किया गया है, जिसकी वास्तविक पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। अब ईडी की जांच के बाद मामले में नए खुलासों और संभावित कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।





