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8वीं-10वीं पास युवाओं ने की सैकड़ों नक्सलियों की नसबंदी, सरेंडर के बाद खुल रहे राज

बस्तर के जंगलों में नक्सली संगठन से जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। संगठन में शादी करने वाले नक्सलियों की नसबंदी गांव के कम पढ़े-लिखे युवाओं से कराई जाती थी। इन युवाओं के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं थी, फिर भी उन्होंने सैकड़ों नक्सलियों की नसबंदी की। अब आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सली सामान्य जीवन जीने और पिता बनने की इच्छा के चलते नसबंदी रिवर्सल ऑपरेशन करवा रहे हैं।

जंगलों में होती थी नसबंदी, डॉक्टर ने दी थी ट्रेनिंग

पूर्व नक्सली डिविजनल कमेटी मेंबर शंकर मुचाकी ने बताया कि साल 2014 में झारखंड से आए डॉक्टर रफीक ने गांव के युवाओं को नसबंदी और छोटे ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग दी थी। इसके बाद जंगलों में ही नक्सलियों की नसबंदी की जाने लगी। ऑपरेशन के लिए जरूरी उपकरण और दवाइयां संगठन पहले से उपलब्ध कराता था। शंकर के मुताबिक, अधिकतर युवक केवल 8वीं से 10वीं तक पढ़े थे और उन्होंने कभी मेडिकल कॉलेज तक नहीं देखा था।

शंकर ने बताया कि संगठन में शादी से पहले पुरुष नक्सलियों की नसबंदी अनिवार्य थी। संगठन का मानना था कि बच्चे होने पर लड़ाके परिवार में उलझ जाएंगे और आंदोलन प्रभावित होगा। शादी के लिए सीनियर नेताओं से अनुमति लेनी पड़ती थी और अनुमति मिलने के बाद नसबंदी कराई जाती थी।

17 साल संगठन में रहा शंकर, अब बनना चाहता है पिता

करीब 15 साल की उम्र में नक्सली संगठन में शामिल हुआ शंकर मुचाकी 17 साल तक सक्रिय रहा। वह कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा था। मार्च 2026 में उसने आत्मसमर्पण किया। अब वह सामान्य जिंदगी जीना चाहता है और पिता बनने की इच्छा पूरी करने के लिए नसबंदी रिवर्सल सर्जरी करवा चुका है।

पूर्व नक्सली हूंगा ने भी बताया कि उसे संगठन की महिला सदस्य से प्यार हो गया था। शादी की अनुमति तो मिल गई, लेकिन पहले नसबंदी करानी पड़ी। साल 2022 में उसकी नसबंदी हुई और बाद में दोनों की शादी हुई। आत्मसमर्पण के बाद उसने भी नसबंदी खुलवा ली है ताकि परिवार बढ़ा सके।

60 से ज्यादा पूर्व नक्सलियों की होगी रिवर्सल सर्जरी

जगदलपुर के महारानी अस्पताल में अब तक 34 पूर्व नक्सलियों की नसबंदी रिवर्सल सर्जरी की जा चुकी है। अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने बताया कि बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों से 60 से ज्यादा पूर्व नक्सलियों को चिन्हित किया गया है।

वेस्ट जोन यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की टीम भी इस विशेष अभियान में शामिल है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन के तरीके को देखकर लगता है कि नसबंदी किसी प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा की गई थी। निजी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी पर 1 से 1.5 लाख रुपए तक खर्च आता है, लेकिन यहां यह प्रक्रिया विशेष अभियान के तहत की जा रही है।

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